स्थान और व्यवहार
जय प्रकाश कुवंरउच्च स्थान पा इतराओ मत,
यह सदा किसी पर नहीं सजता है।
समय की धुरी में पिस कर,
इसे बदलते देर नहीं लगता है।।
स्थान बदल जाने से कभी,
बहुत कुछ हो जाता है।
अपने घर का मालिक भी कभी,
किसी का नौकर बन जाता है।।
स्थान के जगह व्यवहार बनाओ,
व्यवहार ही सदा टीक पाता है।
स्थान तो बदलते रहता है,
व्यवहार ही कायम रह जाता है।।
जय प्रकाश कुवंर
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