लुगा- झुल्ला
जय प्रकाश कुवंर
कालीचरण हमार बचपन के दोस्त हउअन। पढ़ाई लिखाई पुरा करके हमनी दूनो आदमी नौकरी पेशा खातिर शहर में रहे लगनीसन। हमनी दूनो आदमी भोजपुरी भाषी हंईसन। हम शहर में रह के अपना भोजपुरी भाषा के साथ हिन्दी, अंग्रेजी सब बोले लगनी। घर में हम भले भोजपुरी बोलीं लेकिन बाहर आउर आफिस में ज्यादा हिन्दी चाहे अंग्रेजी ही बोले के पड़े। लेकिन कालीचरण घर बाहर सब जगह ज्यादा भोजपुरी भाषा के ही इस्तेमाल करेले। इंहा तक की आफिस में भी भोजपुरी बोले लागेले।
बहुत दिन का बाद अबकी उनका से मुलाक़ात बुढ़ौती में भइल रहल ह। उनका मेहरारू के नैहर में शादी बा। ओही शादी में जाये खातिर उनकर मेहरारू उनका से लुगा कपड़ा खरीदे खातिर बाजार जाये के बोलली। कालीचरण हमरो के साथ बाजार ले गइले। बाजार में एगो नीमन साड़ी कपड़ा के दुकान देख के हमनी दूनो आदमी ढूक गइनीसन। दुकानदार अभी नया जवान लइका रहल। पढ़ लिख कर बड़ा सा कपड़ा के दुकान कइले बा।
दुकानदार से कालीचरण बोलले जे बबुआ हमरा अपना मेहरारू ( लुगाई) के पहिने खातिर एगो नीमन लुगा,एगो झुल्ला आउर एगो डेढ़िया खरीदे के बाटे। हमनी दूनो आदमी के सब सामान देखा द, जेह से पसंद कर लिहींसन। दुकानदार लइका हमार मुंह देखे लागल आउर बोललस जे बाबा रउरा का चाहीं। कालीचरण फिर से बतवलन जे लुगा, झुल्ला आउर डेढ़िया। दुकानदार लइका बोललस जे इ सामान हमरा दुकान में नइखे। तब कालीचरण बोललन जे तोहार दुकान एही सब सामान से भरल बाटे आउर तू बोलत बाड़ जे इ सब दुकान में नइखे। सब सामान दुकान में ताखा पर रखले बाड़ आउर टंगले बाड़।
तब दुकानदार लइका बोललस जे बाबा रउरा साड़ी, ब्लाउज आउर पेटीकोट चाहीं का। कालीचरण बोललन जे ह बबुआ इहे सब चाहीं। जवना कपड़ा के आज काल के लोग साड़ी, ब्लाउज आउर पेटीकोट बोलत बा, उहे सब पहिले हमनी का भोजपुरिया समाज में लुगा, झुल्ला आउर डेढ़िया कहात रहल ह।
भोजपुरिया समाज में स्त्री, औरत आउर पत्नी के लुगाई कहल जात रहल ह। ज्यादातर पत्नी के लोग लुगाई ही कहत रहल ह। आउर लुगा पहनने वाली स्त्री के लोग लुगाई कहत रहल ह। गाँव देहात में लोग पहिले साड़ी के लुगा आउर लुगरी ही कहत रहल ह। लुगा के लुगरी तब कहात रहल ह जब लुगा पुरान होके फाटे का कगार पर आ जात रहल ह।
कालीचरण के बात सुनकर दुकानदार सहित दुकान में बैठल सब ग्राहक लोग ठहाका मारके हंसे लागल आउर दुकानदार लइका कालीचरण के पैर पकड़ के आशीर्वाद लेहले आउर बोलले जे बाबा हमहुँ भोजपुरी भाषी ही बानी लेकिन आधुनिकता के दौर में आपन भोजपुरी के बहुत कुछ भुला बैठल बानी। लोग भी भोजपुरी नाम सब भुला बैठल बा। हमार दुकान मुख्यतः लुगा, झुल्ला आउर डेढ़िया यानि साड़ी ब्लाउज आउर पेटीकोट के ही दुकान ह लेकिनआज तक हमरा दुकान पर सब लोग साड़ी, ब्लाउज आउर पेटीकोट ही मांगत रहल ह, केहू लुगा, झुल्ला आउर डेढ़िया ना मंगले रहल ह। अपना संस्कृति के पुराना नाम याद दिलावे खातिर रउरा के बहुत बहुत प्रणाम आउर धन्यवाद।
कालीचरण अपना लुगाई खातिर मन पसंद लुगा, झुल्ला आउर डेढ़िया खरीदले आउर हमनी दूनो आदमी अपना घर आ गइनीसन।
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