पुरातन और नूतन पुस्तकों से सजेगा बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन

- १ सितम्बर को हिन्दी पखवारा एवं पुस्तक चौदस मेला का उद्घाटन करेंगे केंद्रीय मंत्री जीतन राम माँझी
- प्रतिदिन आयोजित होंगे साहित्यिक कार्यक्रम, विद्यार्थियों के लिए इनामी प्रतियोगिताएँ और पुस्तक-लोकार्पण भी
पटना, ३० अगस्त। १ सितम्बर से से आरंभ हो रहे 'हिन्दी-पखवारा-सह-पुस्तक चौदस मेला' के लिए बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन सज्ज हो गया है। पुरातन और नूतन पुस्तकों से अगले १५ दिनों तक सुधी पाठकों और हिन्दी-प्रेमियों के लिए सम्मेलन-सभागार सजा रहेगा। इसका उद्घाटन पहली सितम्बर को अपराह्न तीन बजे केंद्रीय मंत्री जीतन राम माँझी करेंगे। प्रत्येक दिन सम्मेलन में विविध साहित्यिक आयोजन संपन्न होंगे। विद्यार्थियों के लिए आयोजित होंगी विविध प्रतियोगिताएँ। १४ सितम्बर को १४ हिन्दी सेवियों का होगा सम्मान। प्रतियोगिताओं में सफल विद्यार्थियों को पुरस्कार राशि, प्रशस्ति-पत्र और पदक देकर पुरस्कृत किया जाएगा। उद्घाटन से समापन-समारोह तक अलग-अलग दिनों में, सिक्किम के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद, बिहार विधान सभा के अध्यक्ष नंद किशोर यादव, बिहार के मंत्री संतोष कुमार सुमन, पूर्व केंद्रीय मंत्री डा सी पी ठाकुर, न्यायमूर्ति संजय कुमार, न्यायमूर्ति मान्धाता सिंह, न्यायमूर्ति हेमंत कुमार, कर्मचारी चयन आयोग, बिहार के अध्यक्ष आलोक राज, डा राजवर्द्धन आज़ाद, डा अरुण भगत, अध्यक्ष राज्य महिला आयोग श्रीमती अप्सरा, प्रो किरण घई समेत अनेक गण्यमान्य व्यक्तियों की विशिष्ट उपस्थिति रहेगी।
यह जानकारी देते हुए, सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने बताया है कि, १५ दिनों के इस पुस्तक मेले में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास समेत अनेक प्रकाशकों की दीर्घाएँ लगेंगी। बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के प्रकाशन-विभाग की ओर से लगायी जाने वाली दीर्घा में सम्मेलन की पुस्तकों के साथ प्रदेश के कवियों लेखकों की पुस्तकें भी आकर्षक छूट के साथ उपलब्ध होंगी। उद्घाटन-समारोह में राष्ट्रभाषा-प्रहरी नृपेंद्रनाथ गुप्त की जयंती, पुस्तक-लोकार्पण एवं लघुकथा-गोष्ठी संपन्न होगी।
डा सुलभ के अनुसार २ सितम्बर को विद्यार्थियों के लिए 'श्रुतलेख-प्रतियोगिता', ३ सितम्बर को 'हिन्दी के साहित्यकार' विषय पर व्याख्यान-प्रतियोगिता, ४ सितम्बर को डा विष्णु किशोर झा 'बेचन' जयंती एवं कवि-सम्मेलन , ५ सितम्बर को 'हमारे शिक्षक' विषय पर निबन्ध-लेखन-प्रतियोगिता, ६ सितम्बर को 'कथा-कार्यशाला', ७ सितम्बर को काव्य-कार्यशाला, ८ सितम्बर को कवयित्री-सम्मेलन, ९ सितम्बर को भारतेंदु जयंती एवं 'नाट्य-साहित्य में बिहार का योगदान' विषय पर संगोष्ठी, १० सितम्बर को राजा राधिका रमण प्रसाद सिंह जयंती एवं लघु-कथा गोष्ठी, ११ सितम्बर को केदार नाथ मिश्र 'प्रभात' जयंती एवं कवि-सम्मेलन, १२ सितम्बर को काव्य-पाठ प्रतियोगिता, १३ सितम्बर को 'कथा-लेखन-प्रतियोगिता, १४ सितम्बर को, हिन्दी-दिवस-समारोह एवं हिन्दी-सेवी सम्मान' तथा १५ सितम्बर को समापन-सह-पुरस्कार वितरण समारोह संपन्न होगा।
डा सुलभ ने प्रबुद्धजनों से आग्रह किया है कि 'पुस्तक-चौदस-मेला' में अवश्य पधारें और 'धन-त्रयोदशी' की भावना से आएँ । मन में यह भाव लेकर कि इस मेले से जो लोग भी पुस्तकें क्रय करेंगे उनके घर में 'प्रज्ञा' की वृद्धि होगी। ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार 'धन-त्रयोदशी' के दिन भारत के लोग कुछ न कुछ सामग्री अवश्य क्रय करते हैं, यह सोच कर कि इससे घर में 'श्री' की वृद्धि होगी।
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