लक्ष्मण रेखा
--:भारत का एक ब्राह्मण.
संजय कुमार मिश्र अणु
पहले की औरते
जानती थी मर्यादा
लांघना नहीं है दहलीज
और न उठाना है पर्दा
बचाए रहती थी वो
घर का मान और सम्मान
तभी सभ्य सुशिक्षित
जानती थी संतान
धीर,वीर,बलवान
भक्त,त्यागी गुणवान
एक से एक महान
पर ज्यों ज्यों वह
होती गई आजाद
त्यों त्यों सब हो गया बर्बाद
खोती गई अपनी गरिमा
और खोती गई स्मिता
न वो कन्हैया की राधा रही
न राम की सीता
जैसे जैसे समय बीता
वो बनती चली गई
सूर्पनखा
पहनकर बघनखा
छोड़ ममता का आंचल
पतित होती गई पलपल
खनकाती रह गई चूड़ी
मानकर बेड़ी पायल
खाती रही ठोकर सुनती रही गालियां
ऐसी स्थिति खुद ही पैदा कर ली नारियां
नहीं करना चाहिए परम्परा को अनदेखा
सीता की सुरक्षा के लिए ही था लक्ष्मण रेखा
----------------------------------------वलीदाद,अरवल(बिहार)८०४४०२.
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