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कमाने से ज्यादा गंवा देते राहुल

कमाने से ज्यादा गंवा देते राहुल

(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

इसको कांग्रेस का तो दुर्भाग्य कहेंगे ही, साथ ही यह देश के लोकतंत्र के लिए भी अच्छी बात नहीं है। सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष भी मजबूत होना चाहिए लेकिन सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस संसद में मुख्य विपक्षी दल का दर्जा भी नहीं प्राप्त कर पायी। इसका एक कारण उसका कमजोर नेतृत्व है। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और संभवतः आगे भी वहीं बनें, राहुल गांधी जितना कमाते हैं, उससे ज्यादा गंवा देते हैं। अभी गत दिनों 12 दिसम्बर 21 को राजस्थान में महंगाई विरोधी रैली की। मुद्दा भी मजबूत था और समय भी। कांग्रेस की यह रैली ऐसे समय हुई जब यूपीए मे कांग्रेस के नेतृत्व पर सवाल उठाए जा रहे हैं। महंगाई से आमजनता परेशान है। कांग्रेस की इस रैली से जनता नोटिस ले सकती थी लेकिन जनता के सामने राहुल ने हिन्दू और हिन्दुत्ववादी का विवादास्पद मुद्दा दे दिया। वे हिन्दुत्ववादियों की आलोचना करने लगे। हालांकि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने छद्म हिन्दुत्ववादी कहकर राहुल की भूल सुधारने का प्रयास किया है लेकिन भाजपा उनकी लिपि पर रबर चलाने का मौका नहीं देगी।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जयपुर में ‘महंगाई हटाओ रैली’ में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश में हिंदुत्ववादियों का राज है हिंदुओं का नहीं। उन्होंने कहा कि हिंदुत्ववादियों को बेदखल कर देश में हिंदुओं का राज लाना होगा। कहा कि वह हिंदू हैं लेकिन हिंदुत्ववादी नहीं। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष कहा कि प्रधानमंत्री मोदी व उनके तीन चार हिंदुत्ववादियों ने सात साल में ही देश को बर्बाद कर दिया। उन्होंने कहा कि एक हिंदुत्ववादी प्रधानमंत्री ने किसानों की पीठ में छुरा घोंपा व फिर माफी मांगी। राहुल ने कहा कि आज देश की राजनीति में दो शब्दों हिंदू व हिंदुत्ववादी की टक्कर है। उन्होंने कहा कि हिंदू सत्याग्रही होता है तो हिंदुत्ववादी सत्ताग्रही होते हैं। हिंदू और हिंदुत्ववाद को दो अलग अलग शब्द बताते हुए राहुल ने कहा कि जिस तरह से दो जीवों की एक आत्मा नहीं हो सकती, वैसे ही दो शब्दों का एक मतलब नहीं हो सकता क्योंकि हर शब्द का अलग मतलब होता है। रैली में बड़ी संख्या में उमड़ी भीड़ से कांग्रेस नेता उत्साहित नजर आए। राजस्थान के साथ साथ पड़ोसी राज्यों हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, दिल्ली आदि से लोग तथा देश भर से कांग्रेस के नेता इसमें शामिल हुए। उन्होंने कहा कि वह आज मौजूद लोगों को हिंदू व हिंदुत्ववादी शब्द के बीच फर्क बताना चाहते हैं। उन्होंने कहा, ‘महात्मा गांधी हिंदू थे, गोडसे हिंदुत्ववादी। फर्क क्या होता है? फर्क मैं आपको बताता हूं। चाहे कुछ भी हो जाए हिंदू सत्य को ढूंढता है। मर जाए, कट जाए, पिस जाए, हिंदू सच को ढूंढता है। उसका रास्ता सत्याग्रह है। पूरी जिंदगी वह सच को ढूंढने में निकाल देता है।’ कांग्रेस नेता ने कहा कि महात्मा गांधी ने पूरी जिंदगी सच को ढूंढने में बिता दी और अंत में एक हिंदुत्ववादी ने उनकी छाती में तीन गोलियां मारीं। हिंदुत्ववादी अपनी पूरी जिंदगी सत्ता को खोजने में लगा देता है। उसे सिर्फ सत्ता चाहिए और उसके लिए वह कुछ भी कर देगा। उसका रास्ता सत्याग्रह नहीं उसका रास्ता सत्ताग्राह है।

राहुल ने कहा, ‘यह देश हिंदुओं का देश है, हिंदुत्ववादियों का नहीं है और आज अगर इस देश में महंगाई है, दर्द है तो यह काम हिंदुत्ववादियों ने किया है। हिंदुत्ववादियों को किसी भी हालत में सत्ता चाहिए। इनका सच्चाई से कोई लेना देना नहीं। देश में 2014 से हिंदुत्ववादियों का राज है हिंदुओं का नहीं और हमें हिंदुत्ववादियों को बाहर निकालना है और एक बार फिर हिंदुओं का राज लाना है।’ राहुल गांधी ने अपने भाषण महंगाई, जीएसटी, बेरोजगारी, और कृषि कानूनों समेत अन्य मुद्दों पर भी केन्द्र सरकार को घेरते हुये कहा कि यह देश गरीबों का किसानों का है। किसान और छोटे व्यापारी रोजगार पैदा करते हैं। उन्होंने केन्द्र सरकार पर आरोप लगाया कि इन्हें खत्म कर दिया गया है। राहुल ने कहा कि अभी देश में हिन्दुत्वादियों का राज है, हिंदुओं का नहीं। उन्होंने गीता का उदाहरण देते हुये कहा कि गीता में लिखा है सत्य की लड़ाई लड़ो। इसलिये डरें नहीं। यह देश आपका है। इससे पहले प्रियंका गांधी ने राम राम संबोधन से भाषण की शुरुआत करते हुये उत्तर प्रदेश सरकार पर हमला बोला। प्रियंका ने लखीमपुर घटना को लेकर केंद्रीय मंत्री और केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुये कहा कि आप जागरूक बनें, बीजेपी की सरकार को जवाबदेह बनाएं। प्रियंका ने आरोप लगाया कि केन्द्र के पास 160 करोड़ रुपये के विमान खरीदने के लिए पैसे हैं, लेकिन किसानों के लिए नहीं है। कांग्रेस सरकारों ने जो बनाया उसे बेचा जा रहा है।

महंगाई के खिलाफ कांग्रेस की राष्ट्रीय रैली कहने को केंद्र की एनडीए सरकार के खिलाफ थी लेकिन इसके दो बड़े मकसद माने जा रहे हैं। पहला कांग्रेस को विपक्ष की सबसे बड़ी ताकत के रूप में दिखाना और दूसरा राहुल गांधी को विपक्ष के सबसे बड़े नेता के रूप में प्रजेंट करना। कांग्रेस की रैली के लिए जयपुर से लेकर दिल्ली तक राहुल गांधी के जगह-जगह पोस्टर और कट आउट लगाए गए थे। कांग्रेस ‘ब्रांड राहुल’ को एक बार फिर स्थापित करना चाहती है। कांग्रेस में राहुल गांधी की पहली लॉन्चिंग भी 2013 में जयपुर से ही हुई थी, तब कांग्रेस के चिंतन शिविर में पहली बार राहुल गांधी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चुना गया था। कांग्रेस की यह रैली ऐसे वक्त में हुई है जब यूपीए में कांग्रेस के नेतृत्व और सबसे बडे दल की हैसियत को चुनौती मिल रही है। वो भी यूपीए के घटक दलों से और क्षेत्रीय पार्टियों से। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी यूपीए में कांग्रेस के नेतृत्व को चुनौती दे रही है। ऐसे में जयपुर की इस महंगाई विरोधी रैली से कांग्रेस यह साबित करने की कोशिश करेगी कि यूपीए की असली ताकत और नेतृत्व की क्षमता अभी भी कांग्रेस के पास है। इसके साथ ही यह दिखाने की कोशिश करेगी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देने में राहुल गांधी और कांग्रेस सक्षम है। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल पिछले कई दिनों से खड़ा हो रहा है कि जब रैली का आयोजन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की ओर से किया जा रहा है तो फिर जयपुर को क्यों चुना गया? जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव है खास तौर पर पंजाब और उत्तर प्रदेश को रैली के लिए क्यों नहीं चुना गया? जानकारों का मानना है कि कांग्रेस में कई राज्यों में हालात विकट हैं। दिल्ली में रैली के आयोजन में भीड़ और संसाधन जुटाना आसान नहीं था। यूपी में कांग्रेस बड़ी ताकत नहीं है। पंजाब में जिस तरह से मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के बीच टकराव चल रहा है उसे देखते हुए कांग्रेस को राजस्थान सबसे मुफीद नजर आया। उसकी वजह यह है कि राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच चल रहे संघर्ष पर कैबिनेट विस्तार के बाद विराम लगा है। बड़ी रैली के आयोजन के लिए जिस तरह के संसाधन और भीड़ लानी है उसके लिए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और राजस्थान की सरकार को ज्यादा ठीक समझा गया। इसीलिए रैली का दायित्व राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सौंपा गया। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए भी यह रैली साख और प्रतिष्ठा का सवाल बन गयी थी। इसी वजह से रैली को भव्य बनाने के लिए पूरी ताकत झौंकी जा रही है। मंत्रियों को जिलों में भेजा गया है। भीड़ लाने का दायित्व सौंपा गया है। किस तरह से भीड़ और संसाधन जुटाने हैं सब कुछ जिम्मेदारी मंत्रियों की तय की गई है। हर मंत्री और विधायक को भीड़ लाने का टारगेट दिया गया। इतना सब होते हुए भी राहुल ने एक विवादास्पद मुद्दा भाजपा को सौंप दिया है। (हिफी)
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