प्रकृति सुरक्षा बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा
(मनीषा स्वामी कपूर-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
यह सवाल निश्चित रूप से बहुत महत्वपूर्ण है और गंभीर भी। प्रकृति को नाराज करके हमने कई विपत्तियां मोल ले ली है। उत्तराखण्ड में यह विषय सुप्रीम कोर्ट के सामने आया लेकिन दूसरी तरफ मामला राष्ट्रीय सुरक्षा का था। प्रकृति हमारे लिए महत्वपूर्ण है लेकिन उससे ज्यादा राष्ट्र महत्व रखता है। अगर राष्ट्र ही नहीं होगा तो प्रकृति की रक्षा हम कैसे कर पाएंगे। ब्रिटिश हुकूमत से ही उदाहरण मिल जाते हैं। हमारी प्राकृतिक संपदा का उन्हांेने भरपूर दोहन किया है। इसलिए प्रकृति की रक्षा के लिए भी हमें राष्ट्र की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी। नरेन्द्र मोदी सरकार की चारधाम परियोजना को लेकर पर्यावरण प्रेमियों की दलील को महत्व देते हुए भी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्र सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आलवेदर चारधाम परियोजना की चैड़ाई बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। प्रकृति को कुछ लोग अन्य प्रकार से भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। उत्तराखण्ड में खनन माफियाओं पर अंकुश लगाना जरूरी है।
नरेंद्र मोदी सरकार की चार धाम परियोजना को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने ऑल वेदर राजमार्ग परियोजना में सड़क की चैड़ाई बढ़ाने की इजाजत दे दी है और इसके साथ ही डबल लेन हाइवे बनाने का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत न्यायिक समीक्षा में सेना के सुरक्षा संसाधनों को तय नहीं कर सकती। हाइवे के लिए सड़क की चैड़ाई बढ़ाने में रक्षा मंत्रालय की कोई दुर्भावना नहीं है।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाल के दिनों में सीमाओं पर सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियां सामने आई हैं। यह अदालत सशस्त्र बलों की ढांचागत जरूरतों का दूसरा अनुमान नहीं लगा सकती है। पर्यावरण के हित में सभी उपचारात्मक उपाय सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस एके सीकरी के नेतृत्व में एक निरीक्षण समिति भी गठित की गई है। इसमें राष्ट्रीय पर्यावरण अनुसंधान संस्थान और पर्यावरण मंत्रालय के प्रतिनिधि भी होंगे।समिति का उद्देश्य नई सिफारिशों के साथ आना नहीं है बल्कि उच्चाधिकार प्राप्त समिति की मौजूदा सिफारिशों का कार्यान्वयन सुनिश्चित करना है।समिति हर 4 महीने में परियोजना की प्रगति पर सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट करेगी। अब सड़क की चैड़ाई 10 मीटर करने की इजाजत दे दी गई है।
यह सच है कि राजमार्ग जो सशस्त्र बलों के लिए रणनीतिक सड़कें हैं, उनकी तुलना ऐसी अन्य पहाड़ी सड़कों से नहीं की जा सकती है।हमने पाया कि रक्षा मंत्रालय द्वारा दायर एमए में कोई दुर्भावना नहीं है। आलबेदर रोड सशस्त्र बलों की परिचालन आवश्यकता को डिजाइन करने के लिए अधिकृत है। सुरक्षा समिति की बैठक में उठाई गई सुरक्षा चिंताओं से रक्षा मंत्रालय की प्रामाणिकता स्पष्ट है।सशस्त्र बलों को मीडिया को दिए गए बयान के लिए पत्थर में लिखे गए बयान के रूप में नहीं लिया जा सकता है। न्यायिक समीक्षा के अभ्यास में यह अदालत सेना की आवश्यकताओं का दूसरा अनुमान नहीं लगा सकती है। गौरतलब है कि 11 नवंबर को चारधाम परियोजना में सड़क की चैड़ाई बढ़ाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने विस्तार से सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। याचिकाकर्ता की ओर से कॉलिन गोंजाल्विस ने कहा, हिमालय के पर्यावरण की स्थिति खतरे में है।अभी तक आधी परियोजना पूरी हुई है। ऋषिकेश से माना इलाके में विकास के नाम पर जंगलों की अंधाधुंध कटाई पहाड़ों को विस्फोट से तोड़ने के कार्यों से भू स्खलन की घटनाएं बढ़ी हैं। प्राकृतिक आपदाएं जैसे बाढ़ और बादल फटने की भी घटनाएं बढ़ी हैं। इस बाबत गठित उच्चाधिकार समिति यानी एचपीसी की भी रिपोर्ट्स ने कई गंभीर मुद्दों की ओर इशारा किया है।हिमालय के उच्च इलाकों में पचास किलोमीटर के दायरे में कई हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट चल रहे हैं।चारधाम क्षेत्र में भी विकास के नाम पर अंधाधुंध निर्माण जारी है, फौरन इनको रोकने की जरूरत है। उन्होंने कहा जहां सूरज की रोशनी नहीं आती वहां वनस्पति भी नहीं होती।इस उपाय से हरियाली बढ़ेगी। इन उपायों का आने वाली पीढ़ियों पर असर पड़ेगा क्योंकि पर्यावरण, गंगा यमुना जैसी नदियों के प्रवाह और संरक्षण पर असर पड़ेगा।भगवान चार धाम में नहीं बल्कि प्रकृति में है। उत्तराखंड में खनन का मुद्दा भी बड़ा होता जा रहा है और विपक्षी पार्टियां इसे लेकर राज्य सरकार पर हमलावर दिख रही हैं। ताजा मामला जनपद उत्तरकाशी के भागीरथी (गंगा) नदी पर खनन करने वाले राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के नियमों की धज्जियां उड़ाए जाने के आरोपों से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि यहां जिस तरह खनन किया जा रहा है, उससे यह मुद्दा विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा होता जा रहा है। कांग्रेस जहां पहले ही भाजपा पर खनन संबंधी भ्रष्टाचार के बड़े आरोप लगा चुकी है, तो अब आम आदमी पार्टी ने भी भाजपा सरकार पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं। जनपद उत्तरकाशी में डुंडा व चिन्यालीसौड़ प्रखंड में भागीरथी नदी में खनन माफिया बेलगाम हो गए है। पूरी नदी में कई जगह जेसीबी मशीन उतारकर जमकर खनन किया जा रहा है। जनपद मुख्यालय से करीब 15 किमी दूर डुंडा तहसील क्षेत्र के कच्चडू देवता मंदिर के पास एक खनन कारोबारी ने तो बिना अनुमति और एनजीटी के नियमों को ताक पर रखकर भागीरथी नदी पर सड़क ही बना डाली। बोल्डर व मिट्टी भरकर नदी का प्रवाह भी रोक दिया। खास तौर से गंगोत्री विधानसभा में अवैध खनन पर निशाना साधते हुए आम आदमी पार्टी की नेत्री पुष्पा चैहान ने कहा, आप लगातार प्रदेश पर ऐसे नीति बनाने की बात कर रही है, जिससे सीधे सूबे की जनता को लाभ हो। वहीं, गंगा विचारमंच के प्रदेश संयोजक लोकेंद्र बिष्ट ने भी अवैध खनन को लेकर चिंता जताई। मुद्दा जनपद में गरमाया, तो जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने आनन फानन में अधिकारियों को निर्देश दिए। इसलिए पर्यावरण प्रेमियों को और सरकार को इन खनन माफियाओं के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। (हिफी)
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