बहुआयामी व्यक्तित्व वाले अटल जी
(मनीषा स्वामी कपूर-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जब संसद में कहते थे- सरकारें आएंगी, जाएंगी, पार्टियां बनेंगी, बिगड़ेंगी लेकिन ये देश रहना चाहिए, तब लगता है कि उनसे बढ़कर कोई राजनेता नहीं है। अटल जी जब कहते थे- काल के कपाल पर लिखता-मिटाता हूं, गीत नया गाता हूं... तब लगता है कि उनसे बड़ा कोई कवि नहीं है। अटल जी जब कहते थे कि मन हार कर मैदान नहीं जीते जाते, न मैदान जीतने से मन जीते जाते हैं तो लगता कि इनसे बड़ा कोई दर्शनिक नहीं है। कूटनीति का उदाहरण देते हुए अटल जी ने कहा था- हमारे पड़ोसी कहते हैं कि एक हाथ से ताली नहीं बजती, हमने कहा चुटकी तो बज सकती है, ऐसा बहुआयामी व्यक्तित्व था भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेयी का, जिन्होंने 25 दिसम्बर को जन्म लिया था और 16 अगस्त को स्वर्ग प्रयाण कर गये। आज भी उनकी विराट प्रतिभा की देश भर में चर्चा होती है और अटल जी ने ही स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना के माध्यम से भारत को चारों कोनों से सड़क मार्ग से जोड़ने का सपना देखा था।
अटल जी एक अच्छे नेता होने के साथ-साथ एक अच्छे पत्रकार और कवि भी थे। उन्होंने कई बार भारतीय सदन के अंदर भी कविताओं के जरिए पक्ष और विपक्ष के नेताओं का दिल जीत लिया था। कवित्व का गुण उनको विरासत में उनके पिता से मिला था। तीन बार प्रधानमंत्री रहने वाले अटल बिहारी वाजपेयी जी का जन्म एक मध्यम वर्गीय परिवार में 25 दिसंबर 1924 में मध्य प्रदेश जिले के ग्वालियर के एक गांव में हुआ था (पैतृक गांव बटेश्वर)। उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी एक शिक्षक और एक कवि भी थे। उनकी माता का नाम कृष्णा देवी वाजपेयी और उनके 7 भाई बहन भी थे। वाजपेयी जी ने अपनी हाई स्कूल की शिक्षा सरस्वती शिक्षा मंदिर, गोरखी, बाड़ा, विद्यालय से प्राप्त की इसके बाद उन्होंने स्नातक की शिक्षा लक्ष्मीबाई कॉलेज से पूरी की और विधि स्नातक की डिग्री उन्होंने कानपुर में स्थित डीएवी कॉलेज से अर्थशास्त्र विषय में ली। अटल जी छात्र जीवन से ही राजनीतिक तथ्यों से संबंधित वाद विवाद में हिस्सा लेना पसंद करते थे और वे हमेशा ऐसी प्रतियोगिताओं में भाग लेते रहते थे। आगे चलकर सन् 1939 अपने छात्र जीवन में उन्होंने स्वयंसेवक की भूमिका भी निभाई। उन्होंने हिंदी न्यूज पेपर में संपादक का काम भी किया।उन्होंने दो बच्चियों को गोद लिया था जो बीएन कॉल की बेटियां नमीता और नंदिता थी। आजादी की लड़ाई में वे अनेक नेताओं के साथ मिलकर लड़े। फिर हमारे देश के लिए अत्यंत दुःख भरा दिन रहा, जब 16 अगस्त 2018 को दिल्ली के एम्स अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली।
सन् 1942 में अटल बिहारी वाजपेयी जी ने अपने राजनीतिक जीवन का सफर शुरू किया था। उस समय भारत छोड़ो आंदोलन जोर शोर से चल रहा था और इसी दौरान उनके भाई को इस आंदोलन में गिरफ्तार कर लिया गया था। इनके भाई को 23 दिनों के लिए जेल में रहना पड़ा था, उसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया था। उसी समय उनकी मुलाकात श्यामा प्रसाद मुखर्जी से हुई और उनके आग्रह करने पर उन्होंने भारतीय जनसंघ पार्टी को ज्वाइन कर लिया। भारतीय जनसंघ पार्टी का गठन सन् 1951 में हुआ था। इसके बाद सन् 1957 में जनसंघ पार्टी द्वारा अटल बिहारी वाजपेयी जी को अपने उम्मीदवार के तौर पर उत्तर प्रदेश जिले के बलरामपुर लोकसभा सीट से इलेक्शन के लिए टिकट दी गयी और अटल जी ने लोकसभा चुनाव में अपनी पहली जीत दर्ज की। इसके बाद उनकी उपलब्धि को देखते हुए उन्हें पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया। अटल जी 2 साल तक मोरारजी देसाई की सरकार में वर्ष 1977 से 1979 तक विदेश मंत्री रहे जिससे हमारे देश के प्रति विदेशों में एक विश्वासी देश की पृष्ठभूमि तैयार करने में उनका बहुत योगदान रहा। इसके बाद सन् 1980 में अटल बिहारी वाजपेयी जी ने अपनी एक पार्टी का गठन किया जो थी भारतीय जनता पार्टी और 06 अप्रैल 1980 को अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला। लोकसभा चुनाव सन् 1996 में भारतीय जनता पार्टी का देश भर में पहला विजय चुनाव रहा। इस चुनाव से बीजेपी ने देश में पहली बार अपनी सरकार को स्थापित किया और मात्र 13 दिनों के लिए 06 मई से 21 जून 1996 तक देश के दसवें प्रधानमंत्री के रूप में अटल जी ने शपथ ली। फिर सन् 1988 में सरकार गिरने के 2 साल बाद पार्टी सत्ता में आई और 19 मार्च 1998 में अटल जी ने दूसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली और फिर 10 अक्टूबर 1999 को तीसरी बार प्रधानमंत्री पद के लिए शपथ ली।
अटल बिहारी वाजपेयी जी ने प्रधानमंत्री रहते हुए राजस्थान के पोखरण में सन् 1998 में 11 मई और 13 मई को पांच भूमिगत परमाणु परीक्षण विस्फोट करके हमारे देश को परमाणु शक्ति संपन्न देश बनाया। यह एक साहसिक कदम था, जिससे हमारे देश को अलग ही पहचान मिली। भारत देश का यह परमाणु परीक्षण इतनी गोपनीयता से किया गया था की पश्चिमी देशों की आधुनिक तकनीक भी नहीं पकड़ पायी थी। परमाणु परीक्षण के बाद कुछ देशों ने अनेक प्रतिबंध भी लगाये परन्तु अटल जी इन सब चीजों की परवाह न करते हुए आगे बढ़े और हमारे देश को नई आर्थिक विकास की ऊँचाईयों तक ले गए।अटल जी ने 19 फरवरी 1999 में दिल्ली से लाहौर तक की बस सेवा शुरू की, जिसे सदा-ए-सरहद का नाम दिया गया। बस सेवा शुरू कर के दोनों देश के बीच आपसी रिश्ते में सुधार लाने की पहल की और उस समय उन्होंने पाकिस्तान का दौरा भी किया और वहां के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात भी की।कुछ समय बाद पाकिस्तानी सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ की शह पर पाकिस्तानी सेना और आतंकवादियों ने कारगिल क्षेत्र में घुसपैठ शुरू कर दी और कई पहाड़ की चोटियों पर अपना कब्जा कर लिया। जवाबी कार्यवाई में अटल बिहारी जी की सरकार ने ठोस कदम उठाएं और भारतीय सेना को खुला समर्थन दिया। जिससे कि हमारी सेना ने पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ दिया और उन्हें धूल चटा दी।अटल बिहारी वाजपेयी जी ने ही भारत के सड़क मार्ग को जोड़ने का काम चारों कोनों से किया है। इसमें दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों को राजमार्गों से जोड़ने का काम किया गया जिसे स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना का नाम दिया गया और अभी तक अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार ने ही सबसे ज्यादा सड़के बनवाई है।
अटल जी की सरकार में 100 वर्ष से भी पुराने कावेरी जल विवाद को सुलझाया गया। कई समितियों और आयोगों का गठन किया गया जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा समिति, आर्थिक सलाह समिति, व्यापार एवं उद्योग समिति आदि। राष्ट्रीय राजमार्गों एवं हवाई अड्डों का विकास किया गया। नयी टेक्नोलॉजी, विद्यतीकरण को गति देना, दूरसंचार को बढ़ावा देना आदि। ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा करना और विदेशों में बसे भारतीयों के लिए बिमा योजना को शुरू किया। अर्बन सीलिंग एक्ट समाप्त कर आवास निर्माण को प्रोत्साहन दिया।
नई टेलीकॉम नीति और कोकण रेलवे की शुरुआत की। इनके कार्यकाल में टेलीकॉम क्षेत्र और रेलवे विभाग विकास की नई ऊँचाईयों को छुआ।
अटल जी एक अच्छे प्रधानमंत्री के साथ-साथ एक अच्छे लेख और कवि भी रहे है उनके द्वारा कुछ प्रकाशित रचनाओं के नाम इस प्रकार है- भारत की विदेश नीतिरू नई डायमेंशन, राजनीति की रपटीली राहें, राष्ट्रीय एकीकरण, क्या खोया क्या पाया, मेरी इक्यावन कविताएं, न दैन्यं न पलायन, 21 कविताएं। असम समस्या: दमन समाधान नहीं और शक्ति से संती, ऐसे अमिट अटल को शत्-शत् नमन। (हिफी)
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