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मित बनायें

मित बनायें

       --:भारतका एक ब्राह्मण.
         संजय कुमार मिश्र"अणु"
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ख्वाबों में आती हो,
रात भर जगाती हो।
जब आता हूँ सामने-
तब तुम लजाती हो।।
       मुझसे करती हो बात,
       रोज-रोज आधी रात।
       समझाती रहती हो मुझे,
        प्रेम की घात प्रतिघात।।
खुब ऐसा और वैसा,
जो रहा तेरे पास जैसा।
अब करना चाहती हो-
सबको जैसे को तैसा।।
        तब तुम एक दिन,
        मुझसे भी खेलोगी।
        प्रतिशोध की आग में,
        निश्चित ढकेलोगी।।
जो मानोगी मेरी बात,
तो सुन ले कहता हूँ।
पहले वाली बात भूल,
कह भला चाहता हूँ।।
     आओ हम प्रेम का गीत गायें।
     जो भी मिले उसे मित बनायें।।
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वलिदाद, अरवल(बिहार)
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