मित बनायें
--:भारतका एक ब्राह्मण.
संजय कुमार मिश्र"अणु"
----------------------------------------
ख्वाबों में आती हो,
रात भर जगाती हो।
जब आता हूँ सामने-
तब तुम लजाती हो।।
मुझसे करती हो बात,
रोज-रोज आधी रात।
समझाती रहती हो मुझे,
प्रेम की घात प्रतिघात।।
खुब ऐसा और वैसा,
जो रहा तेरे पास जैसा।
अब करना चाहती हो-
सबको जैसे को तैसा।।
तब तुम एक दिन,
मुझसे भी खेलोगी।
प्रतिशोध की आग में,
निश्चित ढकेलोगी।।
जो मानोगी मेरी बात,
तो सुन ले कहता हूँ।
पहले वाली बात भूल,
कह भला चाहता हूँ।।
आओ हम प्रेम का गीत गायें।
जो भी मिले उसे मित बनायें।।
----------------------------------------
वलिदाद, अरवल(बिहार)हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें|
हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews
https://www.facebook.com/divyarashmimag

0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com