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कांटा होता है

कांटा होता है

       ---:भारतका एक ब्राह्मण.
         संजय कुमार मिश्र"अणु"
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मुझे पता चला-
गुलाब में कांटा होता है।
मुझे पता चला-
कोई ख्वाब में क्यों रोता है।
      पा जींदगी का सफर,
      पकड़ लिया डगर।
      बस चलता जा रहा था-
      बिना कहीं घुमाये नजर।।
अचानक से पांव फिसला,
हाय रे!मुंह से निकला।
कुछ समझता उससे पहले-
कहे सब इधर आ और दिखला।।
       फिसला था पांव डगर,
       हाथ उपर....जरा और उपर।
       बहुत चुभे थे कांटे
       हैं निशाना अंगुलियों पर ।।
 सोचता हूँ जीवन में-
 कांटे चुभा हीं करते हैं।
 पर आने जाने वाले राही-
 राहों पर चलते फिरते हैं।।
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वलिदाद, अरवल(बिहार)
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