हरियाणा: नमाज छोड़ने चले, रोजा गले पड़ा
(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
कभी-कभी हवन करते भी हाथ जल जाते हैं। हरियाणा मंे मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मुस्लिम समुदाय को राहत देने के लिए खुले मंे नमाज की अस्थायी व्यवस्था की थी। मुसलमानों ने इसे अपना अधिकार ही समझ लिया। राज्य की औद्योगिक नगरी गुरुग्राम (गुड़गांव) मंे पिछले तीन महीने से सार्वजनिक स्थलों पर नमाज पढ़ने की समस्या बनी हुई है। वक्फ बोर्ड की जमीन खाली न होने से गुरुग्राम मंे सार्वजनिक स्थलों पर जुमे की नमाज अदा की जाती थी। हिन्दूवादी संगठनों ने इस प्रकार नमाज पढ़ने पर सख्त एतराज जताया। उसी स्थान पर गोवर्द्धन पूजा की गयी और उपले पाथे गये। गुरुग्राम के उपायुक्त कहते हैं कि अब मामले को सुलझा लिया गया है। मुस्लिम और हिन्दू समाज की बैठक मंे मामले को सुलझा लिया गया है। हालांकि विरोध की गुुंजाइश बनी हुई है। उपायुक्त के अनुसार 6 सार्वजनिक जगहों पर नमाज पढ़ने के लिए किराया देना होगा। इस प्रकार की व्यवस्था से सार्वजनिक स्थलों की उपयोगिता का कोई अर्थ नहीं रह जाता। इसीलिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सख्त रुख अपना लिया है। उन्हांेने स्पष्ट शब्दों मंे कहा कि खुले में अर्थात सार्वजनिक स्थलों पर नमाज नहीं होनी चाहिए। दरअसल, सरकार ने पहले ही खुले में नमाज की अनुमति देकर एक गलत परम्परा डाली थी। यही परम्परा नासूर बन गयी।
हरियाणा के गुरुग्राम में अब सार्वजनिक जगहों पर नमाज नहीं होगी। इसके लिए आदेश पहले ही आ चुके हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का सख्त रुख देखने को मिला है। सीएम खट्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि खुले में नमाज नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि खुले में नमाज बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुस्लिम समाज के लोग खुले में नमाज न पढ़ें, भले ही वो अपने घर मे नमाज करें। जिला प्रशासन नमाज को लेकर बातचीत कर रहा है। इससे पहले गुरुग्राम उपायुक्त ने कहा था कि मुस्लिम और हिन्दू समाज के लोगों की बैठक बुलाई गई, जिसमें कई फैसले लिये गए। अब नमाज का विरोध नहीं होगा। इसमें तय हुआ कि अब सार्वजनिक जगहों पर नमाज नहीं होगी। जुमे की नमाज 12 मस्जिदों में होगी। छह सार्वजनिक जगहों पर नमाज पढ़ने के लिए किराया देना होगा। वक्फ बोर्ड की जमीन उपलब्ध होते ही 6 जगहों पर नमाज बंद कर दी जाएगी। इस प्रकार गुरुग्राम में पिछले तीन महीने से चल रहा खुले में नमाज का विवाद अब थमता नजर आ रहा है। अब दोनों पक्षों ने गुरुग्राम के जिला उपायुक्त और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर आपसी सहमति बनाई है कि विवाद वाले स्थान जैसे कि सेक्टर-37, सेक्टर-47 और सरहौल गांव में नमाज अता नहीं की जाएगी। फैसले का मुस्लिम समुदाय ने भी स्वागत किया था। जिला प्रशासन व संयुक्त हिंदू संघर्ष समिति के सदस्यों के साथ बनी इस सहमति पर मुस्लिम समाज ने संतोष जताया था। साथ ही यह भी कहा था कि कुछ लोग इस तरह की अफवाहें फैला रहे थे कि गुरुग्राम में नमाज का विरोध होता है वो बिलकुल गलत है। मुस्लिम समुदाय को कभी भी नमाज अता करने के लिए नहीं रोका गया।
गुड़गांव में नमाज पढ़ने को लेकर कई दिनों से विवाद चल रहा था। गुड़गांव मुस्लिम सोसायटी और सिविल सोसायटी ने मिलकर आरोप लगाया कि हर बार 15-20 हिन्दूवादी संगठन के लोग जुमा की नमाज में खलल डालते हैं। इनके खिलाफ शिकायत भी दी गई लेकिन उसके बावजूद पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही थी। ऐसे में शांति व्यवस्था का बड़ा खतरा था गुड़गांव में जुमे की नमाज को रोकने का मामला दिल्ली पहुंचा। सईदा हमीद, अपूर्वानंद, एसके प्रजापति, दया सिंह, अदीब और अल्ताफ जैसे सिविल सोसायटी और गुड़गांव मुस्लिम सोसायटी के लोगों ने प्रेस कांन्फ्रेंस की। इसमें उलेमा जावेद भी थी जिनके साथ हिन्दूवादी संगठनों ने कथित रूप से दुव्र्यवहार किया था। गुड़गांव मुस्लिम सोसायटी के मुताबिक पहले गुड़गांव में सौ खुली जगहों पर जुमे की नमाज होती थी जिसे हिन्दू वादी संगठनों के दबाव में 18 जगहों पर कर दिया गया। गुड़गांव मुस्लिम सोसायटी के सदस्य अल्ताफ ने बताया कि कुछ चंद लोग नमाज में खलल डालते हैं उनके खिलाफ हमने शिकायत की। हमने संयुक्त हिन्दू राष्ट्र ग्रुप नाम का संगठन है इसके खिलाफ शिकायत दी थी। हालांकि गुड़गांव में जब प्रशासन की दी गई जमीन पर मुस्लिमों को नमाज पढ़ने से हिंदू वादी संगठनों ने रोका तो दया सिंह ने गुरुद्वारे में नमाज के लिए जगह दी और अक्षय यादव ने अपने गैराज की जमीन दी। इन कट्टरपंथी हिन्दुवादी संगठनों के खिलाफ एस एल प्रजापति और दया सिंह जैसे लोग भी खड़े हैं। उनका कहना है कि नमाज में खलल डालने वाले लोग हिन्दुओं के भी दुश्मन हैं। गुड़गांव में रहने वाले प्रजापति ने कहा कि अपनी राजनीति चमकाने के लिए ये सब हिंदूत्व के नाम पर हिन्दू धर्म को भी बदनाम कर रहे हैं। पहले अम्मू ने पंचायत करके माहौल बिगाड़ा उसी के लोग है जो ये काम कर रहे हैं। दरअसल गुड़गांव में काम करने वाले बहुत से कामगार मुस्लिम हैं और यहां हजारों मुसलमानों के नमाज पढ़ने के लिए केवल दो मस्जिद हैं। ऐसी समस्या के चलते प्रशासन ने 2018 में 100 जगहें चिन्हित की थीं जहां खुले में नमाज पढ़ने दी जाए, लेकिन हर जुमे में कुछ हिन्दूवादी संगठनों ने विरोध करना शुरू कर दिया। पहले 100 फिर 37 जगहें दी गई।
बताते हैं कि नवम्बर माह में गुरुग्राम के सेक्टर 37 में मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा करने के लिए जुटे थे। इस दौरान कुछ हिंदू समूह के लोगों द्वारा व्यवधान डालने की कोशिश की गई। तनाव उस वक्त बढ़ गया जब हिंदू संगठनों ने वहां पर एक प्रार्थना की। उनका दावा था कि यह प्रार्थना 26/11 आतंकी हमले में मारे गए लोगों के लिए है। एकत्रित मुस्लिमों ने शुरुआत में वहां से चले जाने का मन बनाया, लेकिन उनमें से 25 लोगों ने जय श्रीराम और भारत माता की जय के नारों के बीच ही नमाज पढ़ी। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच करीब 30 मीटर से भी कम दूरी थी। इस दौरान करीब 150 पुलिसकर्मी वहां पर मौजूद थे, लेकिन उनमें से सिर्फ 30 दोनों पक्षों के बीच मौजूद थे। करीब 20 मिनट के बाद जब नमाज खत्म हुई तो हिंदू समूह के दो लोग इस दूरी को पार कर उस जगह पहुंच गए।बहरहाल, मुस्लिमों ने शुक्रवार को गुरुद्वारों में नमाज नहीं पढ़ी। शहर की गुरुद्वारा सिंह सभा समिति ने कहा कि मुसलमानों को नमाज पढ़ने के लिए जगह की पेशकश नहीं की जाएगी, क्योंकि उन्होंने नमाज के लिए जगह नहीं मांगी है। (हिफी)हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

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