ढूंढना नहीं कोई बहाना सत्ता की चाहत में तू मर्यादा भूल न जाना
मन कभी निरंकुश हो तो अंकुश देकर समझाना।
राजनीति के महाकाश में है तुम्हें पंख फैलाना
पर याद रहे भूल से भी मुस्काना भूल न जाना।।
ढूंढना न कोई बहाना
राजनीति का ताना-बाना, माना बना देता दीवाना
शून्य विश्व में आना-जाना, सागर में डुबकी है लगाना
चित्त स्थिर गर न रहा तो कठिन होगा चुन मोती लाना।।
ढूंढना न कोई बहाना
आग से खेलना राजनीति है, फूंक फूंक कदम बढ़ाना
बहुत दूर जाना है तुमको पथ से नहीं विचलना।
सजग,सचेत,सरल रहना चूके न "विवेक" निशाना
पर याद रहे भूल से भी मुस्काना भूल न जाना।।
ढूंढना न कोई बहाना
पर याद रहे भूल से भी मुस्काना भूल न जाना।
ढूंढना नहीं कोई बहाना।।
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