शिवसेना का धर्म-संकट
(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
महाराष्ट्र में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की मदद से सरकार चला रही शिवसेना लगातार धर्म-संकट से गुजर रही है। इसमें सबसे बड़ी कारक कांग्रेस है। कांगे्रस को लगता है कि महाराष्ट्र उसकी जागीर है, जिसे पहले भाजपा ने छीना था और अब शिवसेना ने कब्जा कर रखा है। ऐसा भी नहीं कि कांग्रेस अब धर्मनिरपेक्षता का झंडा लेकर ही चल रही हो क्योंकि उसके नए नायक राहुल गांधी और प्रियंका गांधी लगातार मंदिरों और तीर्थ स्थलों के चक्कर काटते रहते हैं लेकिन राहुल गांधी ने पिछले दिनों हिन्दू और हिन्दुत्ववादी को लेकर जिस तरह विवाद शुरू किया उससे शिवसेना असमंजस मंे पड़ गयी। शिवसेना हिन्दुत्व और हिन्दुत्ववादी दोनों का समर्थन करती है। इससे पूर्व भी विनायक वीर सावरकर को लेकर कांग्रेस ने शिवसेना को परेशानी मंे डाला था। शिवसेना के इस असमंजस को भाजपा के वरिष्ठ नेता और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भांप लिया है। उन्हांेने कहा कि मैंने और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्पष्ट कर दिया था कि 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा के देवेन्द्र फडणवीस ही सीएम बनेंगे। इसका मतलब यह कि शिवसेना ने विधानसभा चुनाव के बाद धोखा दिया। इस अप्रत्यक्ष आरोप पर शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने जवाब दिया। संजय राउत कहते हैं कि वह बीजेपी थी जिसने सत्ता में बड़ी हिस्सेदारी के लिए शिवसेना को धोखा दिया था। भाजपा नेता ने यह भी कहा कि शिवसेना ने सत्ता के लिए हिन्दुत्व से समझौता कर लिया। शिवसेना को इस धर्म-संकट मंे भी कांग्रेस ने ही डाला है क्योंकि राहुल गांधी बार-बार अपने को हिन्दू और गोडसे को हिन्दुत्ववादी बता रहे हैं।
शिवसेना सांसद संजय राउत ने 20 दिसम्बर को कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का यह दावा ‘वास्तविकता से बहुत दूर’ है कि उन्होंने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह स्पष्ट कर दिया था कि 2019 के राज्य विधानसभा चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी के देवेंद्र फडणवीस ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनेंगे। राउत ने आरोप लगाया कि वह भाजपा थी जिसने सत्ता में बड़ी हिस्सेदारी के लिए शिवसेना को ‘धोखा’ दिया था। शिवसेना के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी हिंदुत्व को कभी नहीं छोड़ेगी। ध्यान रहे उद्धव ठाकरे नीत पार्टी ने 2019 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा से नाता तोड़ लिया था जब मुख्यमंत्री पद साझा करने को लेकर दोनों दलों के बीच मतभेद उभर आए थे। भाजपा से गठबंधन तोड़ने के बाद शिवसेना ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस के साथ हाथ मिलाकर राज्य में महा विकास आघाड़ी सरकार बनाई। भाजपा का प्रयास अब भी यही है कि शिसेना उसके साथ जुड़ जाए। इसके लिए तरह-तरह से प्रयास किये जा रहे हैं। भाजपा नेता अमित शाह ने गत दिनों अपने पुणे दौरे पर कहा कि उन्होंने और प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कर दिया था कि 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद फडणवीस ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री होंगे।ठाकरे और शिवसेना पर निशाना साधते हुए, शाह ने कहा था, ‘क्योंकि आपको मुख्यमंत्री बनना था, इसलिए आपने भाजपा को धोखा दिया और सत्ता के लिए हिंदुत्व से समझौता कर मुख्यमंत्री बन गए।’ इस पर प्रतिक्रिया करते हुए, राउत ने कहा, ‘उनकी बातें वास्तविकता से बहुत दूर हैं। हम इसमें सच्चाई का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। हमसे (शिवसेना), हमारी सरकार और हमारे हिंदुत्व पर सवाल करके वे देश को गुमराह कर रहे हैं, लेकिन लोग उन पर विश्वास करने को तैयार नहीं हैं। मैं राज्य के नेताओं में यह निराशा देख सकता हूं।’ राज्यसभा सदस्य राउत ने कहा कि शिवसेना ने न तो हिंदुत्व को छोड़ा है और न ही कभी छोड़ सकती है।
लगभग तीन महीने पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री और शिवसेना नेता अनंत गीते ने कहा था कि अपनी पार्टी बनाने के लिए कांग्रेस की पीठ में छुरा घोंपने वाले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार शिवसैनिकों के लिए ‘गुरु’ नहीं हो सकते। उन्होंने यह भी कहा कि शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस के गठबंधन वाली महा विकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार सिर्फ एक ‘समझौता’ है। पवार को एमवीए सरकार का वास्तुकार और धुरी माना जाता है, जो 2019 के विधानसभा चुनावों के बाद शिवसेना और भाजपा के बीच संबंधों में खटास के बाद सत्ता में आयी। एक जनसभा में गीते ने कहा, ‘शरद पवार कभी हमारे नेता नहीं हो सकते क्योंकि यह सरकार (एमवीए) केवल एक समझौता है। लोग पवार के लिए जितनी वाहवाही करें, लेकिन हमारे ‘गुरु’ केवल (दिवंगत) बालासाहेब ठाकरे हैं।’ गीते ने कहा, ‘जब तक यह सरकार काम कर रही है, तब तक चलती रहेगी। अगर हम अलग हो गए तो हमारा घर शिवसेना है और हम हमेशा अपनी पार्टी के साथ रहेंगे।’
शिवसेना की इस दिक्कत को कांगे्रस और बढ़ा रही है। यूपी समेत 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष हिंदू बनाम हिंदुत्व का विमर्श खड़ा करने की कोशिश में हैं। इसके लिए वह लगातार दोनों के बीच फर्क समझाने की कोशिश कर रहे हैं। अब उन्होंने दोनों के बीच डीएनए वाला फर्क बताया है। संघ प्रमुख मोहन भागवत के हिंदुस्तान में रहने वाले सभी लोगों का डीएनए एक है वाले बयान पर राहुल गांधी ने कहा है कि हिंदू मानते हैं कि हर आदमी का डीएनए अलग और अनन्य यानी अद्वितीय होता है।कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि जो लोग हिंदुत्व में यकीन रखते हैं उनका मानना है कि सभी भारतीयों का डीएनए एक समान है लेकिन हिंदू मानते हैं कि हर आदमी का डीएनए अलग और अनन्य होता है। कांग्रेस नेता की टिप्पणी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत की टिप्पणी के बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि सभी भारतीयों का डीएनए 40,000 साल से एक समान है। दरअसल, राहुल गांधी इन दिनों हिंदू और हिंदुत्व का फर्क समझाने में लगे हुए हैं। वह खुद को सच्चा हिंदू बताते हुए संघ और बीजेपीवालों को हिंदू नहीं बल्कि हिंदुत्ववादी बताया है जो नफरत फैलाते हैं।
इसी तरह दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की भारत बचाओ रैली में राहुल गांधी ने मैदान में मौजूद कार्यकर्ताओं को बब्बर शेर और शेरनियां कहकर संबोधित किया और बोले, कांग्रेस का कार्यकर्ता किसी ने नहीं डरता। फिर रेप इन इंडिया बोलने पर बीजेपी की माफी का जिक्र छेड़ा और शुरू हो गयै, श्ये लोग कहते हैं माफी मांगो... मेरा नाम राहुल सावरकर नहीं है... राहुल गांधी है... मैं सच बात बोलने के लिए कभी माफी नहीं मांगूंगा... मर जाऊंगा, लेकिन माफी नहीं मांगूंगा। इस प्रकार कांगे्रस ने सावरकर के मामले पर भी शिवसेना को धर्म संकट मंे डाला था। (हिफी)
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