जलवायु परिवर्तन पर अकेला पड़ा अमेरिका
न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र संघ में जलवायु परिवर्तन को लेकर एक प्रस्ताव को लेकर भारत-रूस और चीन एक साथ अमेरिका के खिलाफ हो गए हैं। इससे अमेरिका अलग-थलग पड़ गया। रूस ने जलवायु परिवर्तन को अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा के लिए खतरा बताने वाले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अपनी तरह के पहले प्रस्ताव के खिलाफ वीटो का इस्तेमाल किया। आयरलैंड और नाइजर के नेतृत्व में पेश किए गए प्रस्ताव ने ‘जलवायु परिवर्तन के सुरक्षा प्रभावों संबंधी जानकारी शामिल करने’ का आह्वान किया था, ताकि परिषद ‘संघर्ष या जोखिम बढ़ाने वाले कारकों के मूल कारणों पर पर्याप्त ध्यान दे सके।’ वहीं, भारत-चीन भी इसके विरोध में खड़ा हुआ।
इस प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र महासचिव से जलवायु संबंधी सुरक्षा जोखिमों को संघर्ष निवारण रणनीतियों का ‘एक केंद्रीय घटक’ बनाने के लिए भी कहा गया है। परिषद के पूर्व प्रस्तावों में विभिन्न अफ्रीकी देशों और इराक जैसे विशिष्ट स्थानों में जलवायु परिवर्तन के अस्थिर करने वाले प्रभावों का उल्लेख किया गया है, लेकिन 13 दिसम्बर का प्रस्ताव पहला ऐसा प्रस्ताव है, जिसमें जलवायु संबंधी सुरक्षा खतरों को स्वयं एक मुद्दा बनाया गया है। भारत ने यूएनएससी के एक मसौदा प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया है। इस प्रस्ताव के जरिए जलवायु परिवर्तन से निपटने संबंधी कदमों को ‘सुरक्षित’ करने और ग्लासगो में कड़ी मेहनत से किए गए सहमति समझौतों को कमजोर करने की कोशिश की गई है।
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