हिन्द, हिन्दू, हिन्दी और हिन्दुत्व
पं.मार्कण्डेय शारदेय )
‘हिन्द’ फारसी शब्द है, जिसका अर्थ भारत है।वास्तव में अरबी-फारसीभाषी विदेशियों ने सिन्धु नदी से जोड़कर इस भूभाग को देखा है।भाषाविज्ञान के अनुसार ‘स’ के ‘ह’ उच्चारण से ऐसा हुआ है।यहाँ के निवासियों को उन्होंने हिन्दू कहा।‘स्तान’ स्थान का ही यह परिवर्तित रूप है।इस तरह ‘हिन्दुस्तान’ बना, जिसका अर्थ भी भारत ही है।‘हिन्दुस्तानी’ भी भारतीय हुआ।
चूँकि उन विदेशियों ने भी अपनी उपासना-पद्धति यहाँ फैलाई और उनमें से कुछ रहने भी लगे।ऐसे में यहाँ के निवासियों के साथ फर्क बताने के लिए मूल निवासियों को हिन्दू कहकर रूढ़ किया गया।यहाँ के लोग इससे पहले सनातनी कहलाते थे और इनका धर्म था- सनातन।अब ये स्वयं को प्रचलन के आधार पर हिन्दू कहने लगे और इनका धर्म ‘हिन्दुत्व’ व ‘हिन्दू धर्म’ कहा जाने लगा।इसी तरह भाषा के रूप में चली ‘हिन्दी’ शब्द भी फारसी का ही है।
आगे चलकर अंग्रेज हिन्दु से इण्डु और इण्डिया, इण्डियन का प्रयोग करने लगे।इस तरह हिन्द, हिन्दुस्तान कहें या इण्डिया; ये भारत के ही बोधक हैं।हिन्दू, हिन्दुस्तानी कहें या इण्डियन; ये भारतीयों की ही संज्ञा है।हाँ, हमारे यहाँ संस्कृत का ‘त्व’ प्रत्यय भाववाचक है।इसे हिन्दू शब्द में जोड़कर हिन्दुत्व बना, जिसका अर्थ हिन्दू होने का भाव है।इसी हिन्दुत्व के घेरे में हिन्दुओं की सभ्यता-संस्कृति भी आ जाती है।इस कारण हिन्दू हिन्दुत्व से अगल नहीं हो सकते।भाव आन्तरिक शक्ति है।देह और देही की तरह है।
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