मुस्कुराट
हम आज भी,
तेरी एक मुस्कुराट पर,
तुम पर मरते हैं।
तुम कहती हो तो,
रात को दिन,
दिन को रात कहते हैं।
तुम्हें देखकर हीं,
हम खुद को,
संवरते हैं।
मेरे ईश्वर को भी नहीं मालूम,
हम तुमसे कितना,
प्यार करते हैं।
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अरविन्द अकेला
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