सिडनी संवाद की सार्थकता
(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
दुनिया भर मंे क्षेत्रीय सहयोग और संगठन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसी क्रम मंे आस्ट्रेलिया ने भारत और जापान के साथ मिलकर एक संवाद का आयोजन किया है। यह संवाद सिडनी संवाद के नाम से जाना जाता है। जापान और आस्ट्रेलिया भी भारत की तरह उभरती अर्थव्यवस्था वाले देश हैं। आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्काट माॅरिसन ने इसीलिए भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संबोधन को सम्मान की बात बताया। कोरोना संक्रमण के चलते कई देशों की अर्थव्यवस्था तो पूरी तरह चैपट हो गयी है लेकिन भारत ने कोरोना संक्रमण से निपटते हुए अर्थव्यवस्था को भी गिरने नहीं दिया। देश मंे सौ करोड़ से अधिक लोगों का टीकाकारण किया जा चुका है और हम दूसरे देशों की मदद भी कर रहे हैं। श्री मोदी ने बताया कि भारत की तकनीकी क्षमता को बढ़ाया गया है। भारत में पांच महत्वपूर्ण बदलाव हो रहे हैं। इसमंे युवाओं को भूमिका सौंपी जाती है और देश के 6 लाख गांवों को जोड़ा जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल करंसी-क्रिस्टो करंसी को लेकर सावधान भी किया है। उन्होंने कहा कि सभी देश मिलकर इस दिशा मंे काम करें ताकि यह मुद्रा गलत हाथों में न पड़े। सिडनी संवाद राजनेताओं, उद्योग ़क्षेत्र की हस्तियों और सरकारी प्रमुखों को व्यापक चर्चा के लिए बेहतर मंच दे रहा है। इस तरह के संवाद अन्य देशों मंे भी होने चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 नवम्बर को ‘सिडनी संवाद’ में ‘भारत में प्रौद्योगिकी विकास तथा क्रांति’ विषय पर मुख्य संबोधन दिया। ‘सिडनी संवाद’ 17 से 19 नवंबर तक आयोजित किया जा रहा है। यह ऑस्ट्रेलियन स्ट्रेटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट की एक पहल है। पीएम मोदी की तरफ से सिडनी संवाद को संबोधित करने को ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने सम्मान की बात बताया है। मॉरिसन ने कहा, ‘ऑस्ट्रेलिया और भारत की दोस्ती बहुत गहरी है और समय के साथ हमारे रिश्ते और मजबूत होंगे। हम अंतरिक्ष, विज्ञान, डिजिटल टेक्नोलॉजी समेत कई क्षेत्रों में काफी प्रगति कर रहे हैं। यह ऑस्ट्रेलिया के लिए सम्मान की बात है कि पीएम मोदी सिडनी संवाद को संबोधित कर रहे हैं।’
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में ‘प्रौद्योगिकी विकास और क्रांति’ थीम पर अपने विचार व्यक्त किए। उनके संबोधन से पहले ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने उद्घाटन भाषण दिया। ‘सिडनी संवाद’ दरअसल राजनेताओं, उद्योग क्षेत्र की हस्तियों और सरकारी प्रमुखों को व्यापक चर्चाएं करने, नए विचार सृजित करने और उभरती एवं महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों से उत्पन्न अवसरों एवं चुनौतियों की सामान्य समझ विकसित करने की दिशा में काम करने के लिए एक मंच पर लाने का प्रयास है।
पीएम मोदी ने कहा, ‘भारत में पांच अहम बदलाव हो रहे हैं। हम सबसे व्यापक पब्लिक इंफर्मेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रहे हैं। हम 60 हजार गांवों को जोड़ने की राह पर है।’ उन्होंने कहा, ‘हमने कोविन और आरोग्य सेतु का उपयोग कर तकनीक के इस्तेमाल से भारत में वैक्सीन के 110 करोड़ डोज पहुंचाए हैं।’ इस दौरान पीएम मोदी ने अन्य देशों के साथ भारत के संबंधों पर भी बात की। उन्होंने कहा, ‘लोकतंत्र और डिजिटल अगुआ के रूप में भारत साझा समृद्धि और सुरक्षा के लिए साझेदारों के साथ काम करने के लिए तैयार है। भारत की डिजिटल क्रांति की जड़ें हमारे लोकतंत्र, हमारी जनसांख्यिकी और हमारी अर्थव्यवस्था के पैमाने से जुड़ी हुई हैं। इसे हमारे युवाओं के नवाचार और उद्यम ने ताकत दी है।’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘सिडनी संवाद’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत की तकनीकी क्षमता को लेकर बात की। उन्होंने कहा कि यह दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी के लिए भी एक सम्मान है।
पीएम मोदी ने देश में वित्तीय सेवा विभाग की तरफ से सम्मेलन में भी विचार रखा। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग की तरफ से आयोजित सम्मेलन के समापन सत्र को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने निर्बाध ऋण प्रवाह और आर्थिक विकास के लिए तालमेल बनाना’ विषय पर चर्चा की। उन्होंने कहा है कि सरकार के प्रयासों से आज भारत का बैंकिंग क्षेत्र बहुत मजबूत स्थिति में है। साथ ही उन्होंने जनधन समेत सरकार की तरफ से लिए गए नए फैसलों पर भी बात की।
पीएम मोदी ने कहा, ‘सरकार ने बीते 6-7 वर्षों में बैंकिंग सेक्टर में जो सुधार किए, बैंकिंग सेक्टर का हर तरह से सपोर्ट किया, उस वजह से आज देश का बैंकिंग सेक्टर बहुत मजबूत स्थिति में है। आप भी ये महसूस करते हैं कि बैंकों का आर्थिक स्वास्थ्य अब काफी सुधरी हुई स्थिति में है।’ उन्होंने कहा, ‘2014 के पहले की जितनी भी परेशानियां थीं, चुनौतियां थीं हमने एक-एक करके उनके समाधान के रास्ते तलाशे हैं। हमने एनपीए की समस्या को एड्रेस किया, बैंकों को रिकैपिटलाइज किया, उनकी ताकत को बढ़ाया।’ पीएम मोदी ने कहा, ‘2014 में बैंकों की शक्ति को पहचान कर मैंने उनको आहृवान किया की मुझे जन-धन अकाउंट का बड़ा मूवमेंट खड़ा करना है, मुझे गरीब की झोपड़ी तक जाकर बैंक खाते
खुलवाने हैं।’ उन्होंने कहा, ‘जब देश के सामने एक लक्ष्य रखा कि हमें जन-धन खाते खोलना है, तो मैं आज गर्व के साथ सभी बैंकों का उल्लेख करना चाहूंगा, सभी बैंक कर्मचारियों का उल्लेख करना चाहूंगा, जिन्होंने इस सपने को साकार किया।’
पीएम का कहना है कि जनधन खातों के चलते क्राइम रेट कम हुआ है। उन्होंने बताया, ‘आज जब देश वित्तीय समावेश पर इतनी मेहनत कर रहा है तब नागरिकों की उत्पादक क्षमता को अनलॉक करना बहुत जरूरी है। जैसे अभी बैंकिंग सेक्टर की ही एक रिसर्च में सामने आया है कि जिन राज्यों में जन-धन खाते जितने ज्यादा खुले हैं, वहां क्राइम रेट उतना ही कम हुआ है।’ पीएम मोदी ने इस दौरान पिछली सरकारों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘हमने पिछली सरकार की तरफ से तैयार किए गए 5 लाख करोड़ रुपयों के कर्ज की भी वसूली की। हमने हमारे बैंकिंग सिस्टम के काम करने के तरीके को बदल दिया।’ उन्होंने कहा, ‘हम आईबीसी जैसे सुधार लाए, अनेक कानूनों में सुधार किए, डेब्ट रिकवरी ट्रिब्युनल को सशक्त किया। कोरोना काल में देश में एक समर्पित स्ट्रेस्ट एसेट मैनेजमेंट वर्टिकल का गठन भी किया गया।’ इस प्रकार की नीतियां ही अन्य देशों को लुभा रही हैं। (हिफी)
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