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घातक

घातक

आज तुम
जितनी भी सुख सुविधाओं का   
कर रहे हो उपभोग 
सब विज्ञान रुपी 
बरगद की छांव में कर रहे हो   
परंतु, तुम्हारी आंखों पर 
आज भी चढ़े हैं अंधविश्वास के चश्में

इसलिए कि 
एक षड्यंत्र के तहत 
तुम्हारे सामने जा रहे हैं परोसे   
कि पिछले जन्म का तुम 
पा रहे हो पुण्य 
इस जन्म में भी 
अगर रखोगे अगाध श्रद्धा 
तो संवर जाएगा अगला जन्म

बस तुम 
अगले जन्म को संवारने में ही   
लगा दे रहे हो 
बिना सोचे समझे 
अपनी गाढ़ी कमाई का बहुत बड़ा हिस्सा 
और वह 
तुम्हारी मूर्खता पर अट्टाहास करता 
बैठे-बैठे 
बढ़ाए जा रहा है अपनी तोंद

भीतर-भीतर मच्छर की भांति 
वह रोज दिन 
चूस रहा है तुम्हारा खून 
परंतु 
नहीं टूट रही है तुम्हारी नींद

तुम्हें आस्था के दलदल में 
फंसाने के लिए 
रचा जा रहा है इतना षड्यंत्र 
कि तुम चाहकर भी 
उससे निकल न सको

यही कारण है 
कि तुम्हें 
इस विज्ञान युग में भी 
खुद के विकास में 
एहसास हो रहा है 
किसी की कृपा दृष्टि 
यही तुम्हारे जीवन के लिए 
सबसे बड़ा है घातक

      अलखदेव प्रसाद'अचल
       पचरुखिया मोड़,
      पोस्ट- सिहाड़ी
      जिला- औरंगाबाद (बिहार)824115
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