बिहार में विश्वविद्यालयों में भ्रष्टाचार
जय प्रकाश कुअर
सन् 1948 में डा० राधाकृष्णन की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग का गठन हुआ था! भारत सरकार द्वारा नियुक्त विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग के सुझाव के अनुसार सन् 1953 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना की गयी! सन् 1956 में इसे संसद के अधिनियम द्वारा वैद्धानिक संस्था स्वीकार किया गया!
परन्तु इसके बावजूद वह सफलता शिक्षा क्षेत्र में नहीं मिली जो अपेक्षित थी! अत: पुनः देश भर के लिए समान शिक्षा नीति का निर्माण करने के उद्देश्य से सन् 1964 में कोठारी आयोग का गठन किया गया! इस आयोग के एक प्रावधान के मुताबिक राष्ट्रीय उच्च शिक्षा अभियान चलाया गया! इसके तहत बिहार में पटना विश्वविद्यालय, पटना, मगध विश्वविद्यालय, बोधगया, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा, भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर, जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा, टी० एम ० बी ० विश्वविद्यालय, भागलपुर, और बी० एन ० एम ० विश्वविद्यालय, मधेपुरा की स्थापना हुई! इस तरह कुल 14 विश्वविद्यालय बिहार में कार्यरत हैं और कुछ और विश्वविद्यालय भी प्रस्तावित हैं!
बिहार स्टेट उच्च शिक्षा काउंसिल के मुताबिक पठन पाठन के अलावा निम्नलिखित मुख्य कार्य विश्वविद्यालयों के अधीन रखा गया:-1. शैक्षणिक और परीक्षा कैलेंडर बनाना और उसका अनुपालन करना! 2. कालेज और विश्वविद्यालयों को आधारभूत संरचना प्रदान करना! 3. निर्धारित पदों पर शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों की बहाली सुनिश्चित करना! 4. मुफ्त वाईफाई की सुविधा कालेज और विश्वविद्यालयों को प्रदान करना! 5. एक वर्कसोप 30.4.2016 को संगठित हुआ जिसके अनुसार केन्द्र सरकार द्वारा प्रद्त फंड राशि और राज्य सरकार द्वारा प्रद्त समान फंड राशि का उचित उपयोग सुनिश्चित करना था!
लेकिन ऐसा पाया गया है कि उपरोक्त प्रावधानों में अनेक कमियाँ दिखाई पड़ने लगी हैं! वित्त अनुदानित विश्वविद्यालयों और कालेजों में कार्यरत शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों की स्थिति दयनीय है! ऐसे आरोप लगते रहे हैं कि प्रोफेसरों की बहाली में अनेक धांधलियां होती रही हैं और समयबद्ध बहाली नहीं होती है! इसके लिए सेलेक्शन कमिटी की गठन करने की मांग भी की जाती रही है!
लेकिन हाल ही में बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग द्वारा 15 जुलाई को असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर बहाली के लिए साक्षात्कार शुरू किया गया! पहले दिन अंगिका विषय के लिए साक्षात्कार हुआ और 24 घंटे के अंदर ही आयोग ने रिजल्ट जारी करते हुए तीन अभ्यर्थियों को सफल घोषित कर दिया! एक अन्य विषय पुराण के साक्षात्कार के बाद शीघ्र ही उसका भी रिजल्ट जारी हुआ! इस तरह इस बार कुल 52 विषयों के लिए कुल 4648 पदों पर बहाली के लिए इंटरव्यू शुरू हो गया है! इस तरह उपरोक्त आरोप पर इस तरह की कारवाई ने सबको आश्चर्य में डाल दिया है!
हाल ही में कुछ विश्वविद्यालयों में वी ० सी ० के बहाली में भी गड़बड़ी की शिकायत सामने आयी है तथा कुछ आर्थिक गड़बड़ियां भी पायी गयी है! मौलाना मजहरूलहक अराबिक एण्ड परसियन विश्वविद्यालय के वी ० सी ०, महमद कुदुस ने अपने पूर्वाधिकारी के उपर घोर अनैतिकता का आरोप लगाया है!
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के वी ० सी ०, सुरेन्द्र प्रताप सिंह के उपर अनियमितता के कुछ आरोप और राज भवन के कुछ आफिसीयल के उपर भी करप्शन के आरोप नोटिस में आये हैं! इस संबंध में बिहार के मुख्यमंत्री जी ने बिहार के राज्यपाल सह चांसलर को पूर्ण जांच के लिए लिखा है! जिस सुरेन्द्र प्रताप सिंह वी ० सी ० के उपर करप्शन के चार्ज लगे हैं, उन्हें चांसलर द्वारा बेस्ट वी० सी० का उपहार दिया गया है! उनके उपहार प्रदान सेरेमनी में बिहार के शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग का कोई अधिकारी नहीं गया था!
मगध विश्वविद्यालय के वी० सी० श्री राजेन्द्र प्रसाद के घर और कार्यालय पर विशेष निगरानी यूनिट ने धावा बोलकर उनके घर से दो कड़ोर कैश हासिल किया था! उनके घर से इस तरह की नगदी करोड़ों की राशि का निगरानी विभाग द्वारा हासिल करना यह दर्शाता है कि किस बड़े पैमाने पर उन्होंने गबन और गड़बड़ी की है!
बहुत से शैक्षणिक विद्वानों और महारथियों ने इन सब करप्शन के लिए मगध विश्वविद्यालय और ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के वाइस चान्सलरों की घोर निंदा की है! उनका कहना है कि ऐसे लोगों ने शैक्षणिक माहौल को काफी गंदा किया है! इन लोगों को उनके दफ्तर से तुरंत हटाना चाहिए! बिहार शैक्षणिक एसोसिएशन के फेडरेशन ईकाई ने भी ऐसा ही मांग किया है! उपरोक्त तथ्यों को देख कर यह लगता है कि बिहार में विश्वविद्यालय शिक्षा क्षेत्र में बहुत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार चल रहा है! बिहार सरकार को इस दिशा में तुरंत उचित कार्रवाई करने की जरूरत है!
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