विविधता से भरी दुनिया
(अचिता-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
यह दुनिया अजब-गजब परंपराओं और रीति-रिवाजों से भरी है। इन रीति-रिवाजों में कहीं आस्था जुड़ी है तो कहीं अज्ञानता भी है। आस्था को बनाये रखने के साथ अज्ञान को दूर करने का प्रयास किया जाना चाहिए। चीन के एक प्रांत में आदिवासी समुदाय के लोग आज भी हंसिए से बाल काटते हैं, तो उत्तरी थाइलैण्ड में महिलाएं अपनी गर्दन में धातु के छल्ले इस तरह पहनती हैं जिससे उनकी गर्दन लम्बी दिखने लगती है। मानते हैं कि यहां बाघ हमला करते हैं और वे गर्दन ही पकड़ते हैं। इसलिए गर्दन में छल्ले पहने जाते हैं।
हंसिया से काटे जाते बाल
दुनिया में ऐसे कई आदिवासी समुदाय हैं जिनकी परंपराएं विश्व प्रसिद्ध हैं। लोग इनके बारे में जानकर दंग हो जाते हैं मगर ये आदिवासी जनजातियां आज भी अपनी मान्यताओं और परंपराओं को कायम रखे हुए हैं। चीन की एक जनजाति जो अपनी बरसों पुरानी परंपराओं का पालन करती है। इस समुदाय में मर्दों को बंदूक रखने की छूट है और उनके बाल हंसिया से काटे जाते हैं! बेशक ये हैरान करने वाली परंपरा है जो गुइजो प्रांत के कुछ लोगों के जीवन का हिस्सा है। हम बात कर रहे हैं मियाओ अल्पसंख्यक जनजाति की जो बाशा गांव के निवासी हैं। ये गांव चीन के अन्य गांवों से काफी अलग है। वो इसलिए कि ये चीन की एक मात्र ऐसी जगह हैं जहां के निवासियों को बंदूक रखने की इजाजत है। एक बार चीन की सरकार ने यहां के लोगों की बंदूकों को जब्त करने का निर्णय लिया था मगर गांव के लोगों से उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ा, जिसके बाद सरकार ने यहां के लोगों को इजाजत दी कि वो बंदूक रख सकते हैं। गांव में 400 से ज्यादा परिवार हैं और रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां की कुल आबादी 1 हजार से ज्यादा है। गांव के लोग आत्मनिर्भर हैं इसलिए इन्होंने खुद को बाहरी दुनिया से काट लिया है। इस गांव के लोगों में बंदूकों का प्रदर्शन करने का रिवाज है। जो कोई भी इस गांव में जाता है उनका स्वागत यहां के मर्द बंदूक चलाकर करते हैं। हालांकि उनका मकसद हिंसा फैलाने या डर पैदा करने का नहीं होता है। इस गांव के पूर्वज वीर सैनिक थे जो गांव की रक्षा घुसपैठियों और जंगली जानवरों से करते थे। इसलिए वो अपने साथ बंदूक रखा करते थे। यही वजह है कि आज भी यहां के लोग राइफल लिए रहते हैं। 15 साल की उम्र में हर मर्द को बंदूक दे दी जाती है। मियाओ लोगों से जुड़ी सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात ये है कि यहां के मर्दों के बाल हंसिया से काटे जाते हैं। ना ही कैंची का इस्तेमाल होता है और ना ही पानी या किसी अन्य चीज का उपयोग किया जाता है। 7 से 15 साल की उम्र के बीच युवक को दो विकल्प दिए जाते हैं या तो वो अपने बाल कटवा ले और सर के बीच में एक लंबी चोटी छोड़े जिसे जूड़े की तरह बांधा जाता है, या फिर वो बाल ना कटवाए और जूड़ा बांध ले। हालांकि अधिकतर मर्द हंसिया से बाल कटवा लेते हैं। उनकी चोटी उनकी बहादुरी और पौरुष का प्रतीक होता है।
महिलाएं गर्दन भर पहनती धातु के छल्ले
दुनिया में सदियों से कई रीति-रिवाज चले आ रहे हैं जिनके बारे में जानकर हर कोई दंग हो जाता है। लोगों की आस्था से जुड़े ये रिवाज आज भी प्रचलित हैं। बहुत सी जनजातियां और समुदाय अपनी परंपराओं को बचाकर रखना चाहते हैं इसलिए गुजरे वक्त की अनोखी परंपराओं को वो आज भी साथ लिए चल रहे हैं। ऐसी ही एक प्रथा म्यांमार की एक जनजाति में सालों से चली आ रही है। इस खास जनजाति की महिलाएं अपनी गर्दन में धातु के छल्ले पहनती हैं जिससे उनकी गर्दन काफी विचित्र ढंग से लंबी लगने लगती है।
उत्तरी थाइलैंड और म्यांमार के बॉर्डर पर करेनेनी जनजाति रहती है जिसे कयान लहवी कहते हैं। कयान लोग अपनी औरतों की बेहद अनोखी वेशभूषा के कारण जाने जाते हैं। औरतें अपनी गर्दन में रिंग यानी छल्ले पहनती हैं जिसे देखकर ऐसा लगता है कि उनकी गर्दन खिंची हुई है और उनका सर गोल्ड के एक प्लेटफॉर्म के ऊपर रखा हुआ है। ये रिवाज सदियों पुराने हैं और अब के लोगों को ठीक से पता भी नहीं है कि इन रिवाजों का पालन क्यों किया जाता है। आपको बता दें कि करीब 2 दशक पहले करेनेनी जनजाति और म्यांमार की सरकार के बीच हिंसक गृह युद्ध छिड़ गया जिसके बाद कयान लोगों को म्यांमार से भागकर थाइलैंड के उत्तरी पहाड़ी इलाके में जाकर बसना पड़ा। ऐसा माना जाता है कि गांव के इलाकों में सदियों से बाघ पाए जाते हैं जो इंसानों पर हमला कर देते हैं। हमले के दौरान वो सबसे पहले इंसान की गर्दन पर प्रहार करते हैं। इसलिए यहां की महिलाओं ने सालों से गले को धातु के छल्लों से ढकना शुरू कर दिया। एक मान्यता ये भी है कि पुराने वक्त में दूसरी जनजाति के लोग जब हमला करते थे तो महिलाओं को अगवा करके ले जाते थे। इस अत्याचार से बचने के लिए महिलाओं ने गले में छल्ले पहनने की शुरुआत कर दी क्योंकि उनका मानना था कि इससे वो कम सुंदर लगेंगी और पुरुष उन्हें अगवा नहीं करेंगे। हालांकि, इस अद्भुत रिवाज ने इन महिलाओं की खूबसूरती को और भी निखार दिया है। मगर इन छल्लों से महिलाओं को काफी मुश्किल भी होती है। बचपन से पहनाए गए इन छल्लों के कारण गला खिंचता जाता है और कॉलर बोन को ये रिंग नीचे ढकेलती जाती हैं। इस वजह से गले की हड्डी में गंभीर चोटें भी लग जाती हैं। कयान लोग थाइलैंड में शरणार्थियों की तरह रहते हैं। इसलिए सरकार ने उनको कई सुविधाओं से वंचित कर रखा है। उनके सरकारी आईडी कार्ड्स नहीं बने हैं जिसके कारण उनके बच्चे छठी क्लास से आगे नहीं पढ़ पाते। यही नहीं, उन्हें आईडी न होने के कारण मेडिकल इंश्योरेंस भी नहीं मिल पाता जिस वजह से उनके लिए अस्पतालों में इलाज करवाना काफी महंगा साबित होता है। यहां इन लोगों के लिए गांव बनाए गए हैं जिनसे बाहर निकलने की उन्हें इजाजत नहीं है। हालांकि, दुनियाभर से पर्यटक इन अद्भुत रिवाजों वाले लोगों को देखने आते हैं और ये लोग अपनी खास शिल्पकारी उन्हें बेचकर पैसे कमाते हैं। (हिफी)
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