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हालावाद के जनक हरिवंश राय बच्चन

हालावाद के जनक हरिवंश राय बच्चन 

जहानाबाद । सच्चिदानंद शिक्षा एवं समाज कल्याण संस्थान की ओर से आयोजित हालावाद के प्रवर्तक हरिवंश राय बच्चन की जयंती के अवसर पर जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन जहानाबाद के उपाध्यक्ष साहित्यकार व इतिहासकार सत्येन्द्र कुमार पाठक ने कहा कि हरिवंशराय बच्चन की कविताएं दिल को छू जाने वाली एवं हर उम्र के लोगों को प्रभावित करती है । उनकी कविता सच्चाई का आइना में जिंदगी की हकीकत की एक अलग ही परिभाषा पढ़ने को मिलती है ।भारतीय साहित्य के प्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन का जन्म 27 नवबंर 1907 को इलाहाबाद के प्रतापगढ़ जिले के एक छोटे से गांव बापूपट्टी में हुआ था । एक साधारण कायस्थ परिवार में जन्मे बच्चे प्रताप नारायण श्रीवास्तव और सरस्वती देवी के बड़े बेटे थे. इनको बचपन में लाड़ से बच्चन कहा जाता था । बाद में हरिवंश राय बच्चन ने अपने नाम से श्रीवास्तव हटाकर बच्चन लगा दिया था । 1926 में श्यामा बच्चन से विवाह हुआ था, जो उस समय 14 वर्ष की थी.1936 में उनका लंबी बीमारी के चलते निधन हो गया । 1942 में बच्चन जी ने तेजी सूरी से दूसरी शादी की थी । तेजी बच्चन से अमिताभ और अजिताभ पुत्र हैं । कुशल साहित्यकार कवि और लेखक हरिवंश राय की शुरुआती शिक्षा म्यूनिसिपल स्कूल, कायस्थ पाठशाला और गवर्नमेंट स्कूल से हुई थी. हरिवंश राय ने 1938 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. किया और सन् 1939 में काशी विश्वविद्यालय से बी.टी.सी. की डिग्री हासिल की थी. वह यहां 1942 से 1952 तक प्रवक्ता रहे. इसके बाद इंग्लैंड चले गए. वहां इन्होंने कैंब्रिज विश्वविद्यालय से इंग्लिश लिटरेचर में पीएचडी की उपाधि मिली. हरिवंश राय दूसरे ऐसे भारतीय थे जिन्हें कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से इंग्लिश लिटरेचर में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त हुई थी । ऑल इंडिया रेडियो अलाहाबाद में काम करते थे । सन् 1955 में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में इन्होंने हिंदी विशेषज्ञ के पद पर संभाला था । 1966 में राज्य सभा के सदस्य हुए थे । भारत सरकार ने हरिवंश राय को साहित्य अकादमी अवार्ड दिया गया. हिंदी साहित्य में इनके विशेष योगदान के लिए1976 में पद्म भूषण से सम्मानित किया था. हरिवंशराय को सरस्वती सम्मान, नेहरु अवार्ड, लोटस अवार्ड से नवाजा गया था । हरिवंश राय बच्चन, एक ऐसे कवि थे जो 20 वीं सदी में भारत के सर्वाधिक प्रशंसित हिंदी भाषी कवियों में से एक थे. अवधी, हिन्दी भाषा पर इनकी खास पकड़ थी । कविताओं ने भारतीय हिन्दी साहित्य में बहुत परिवर्तन किया था, इनकी शैली पहले के कवियों से काफी अलग थी । नई सदी में हालावाद का जनक कहा जाता हैं. इनकी रचनाओं ने काव्य में नयी धारा का संचार किया है । हरिवंश राय बच्चन का स्वभाव तेज होने के कारण एंग्री मेन कहा गया है । अमिताभ ने अपने पिता की कई कविताओं को अपनी आवाज दी है । हरिवंशराय जी ने 18 जनवरी 2003 में अंतिम सांस ली थी । काव्य संग्रह: मधुशाला, मधुकलश, मधुबाला, एकांत संगीत, निशा निमंत्रण, आरती और अंगारे, आकुल-अंतर, टूटी-फूटी कड़ियां, मिलन यामिनी, नए पुराने, झरोखे, बुध और नाच घर. आत्मकथा - इन्होंने चार खंडों में अपनी आत्मकथा लिखी जो इस प्रकार है-क्या भूलूं क्या याद करूं, नीड़ का निर्माण फिर, बसेरे से दूर, दसद्वार से सोपान तक. अनुवाद – हैमलेट, जनगीता, मैकबेथ और डायरी है । इस अवसर पर संस्थान के कार्यक्रम पदाधिकारी पप्पू कुमार , पी एन बी के सेवानिवृत्त अधिकारी सत्येन्द्र कुमार मिश्र , उर्वशी ,प्रियंका आदि ने बच्चन जी के कीर्तित्व और रचनाओं पर प्रकाश डाला ।
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