हिंदी दिवस के अवसर पर पुलकित अपना तन मन है
कर्मा रोड स्थित चित्रगुप्त सभागार में औरंगाबाद जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन एवं साहित्य कुंज के संयुक्त तत्त्वावधान में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता डॉक्टर सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह तथा संचालन क्रमशः धनंजय जयपुरी, नागेंद्र केसरी एवं अरविंद अकेला ने किया।
नव बिहार टाइम्स के संपादक कमल किशोर, अधिवक्ता उदय कुमार सिंह एवं श्री राम राय ने सभाध्यक्ष के साथ समवेत रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया। बोकारो से पधारीं श्रीमद्भागवत एवं रामचरितमानस की प्रवाचिका कोकिल कंठ सुश्री अनुराधा सरस्वती बड़े ही मधुर स्वर में सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर उपस्थित दर्शकों, श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। गीतकार समुंदर सिंह ने अपनी कविता-'जन्म लिया जिसके आंगन में गोद में जिसकी बड़ा हुआ' के माध्यम से हिंदी की दुर्दशा और भविष्य में होने वाले उसके दुष्परिणामों का दर्शन कराया। नवोदित कवि एवं गजलकार हिमांशु चक्रपाणि ने -'भारत की मिट्टी की शान, भारत मां के पूत महान' नामक कविता के माध्यम से सदन में बैठे लोगों के मन मानस में भारत माता के प्रति निष्ठा एवं कर्तव्यबोध का भान कराया। चौहान आरती सिंह की कविता- "हिंद देश और हिंदी से पहचान हमारी है, विश्व पटल पर भारत मां की महिमा न्यारी है" ने सदन में बैठे सुधि श्रोताओं कि खूब तालियां बटोरी। 'जगपति जगदाधार प्रभु तू कर लेना स्वीकार' नामक कविता का सस्वर पाठ कर कवि नागेंद्र केसरी ने श्रोताओं एवं दर्शकों के मन में भक्ति रस का संचार कर दिया। कवि कालिका सिंह,जवाहर जुझारू, डॉ रामाधार सिंह एवं राम किशोर सिंह की कविताएं भी खूब सराही गईं। श्री राम राय ने एक व्यंग्य प्रस्तुत करते हुए कहा -' मुस्कुराते हैं हम खाकर दवा अंग्रेजी की,आज तक लिखे नगर पुर्जे हिंदी में।'
धनंजय जयपुरी की कविता- 'हिंदी दिवस के अवसर पर पुलकित अपना तन मन है, हे हिंद देश हे हिंदी तुझको शत-शत बार नमन है' पर सदन में बैठे साहित्यानुरागियों ने जमकर तालियां बजाईं।
प्रेमेंद्र मिश्र,डॉ महेंद्र पांडेय, डॉ सुरेंद्र प्रसाद मिश्र, अजय श्रीवास्तव इत्यादि साहित्यकारों ने हिंदी के प्रति लोगों के घटते लगाव को अपने देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बतलाया। उन्होंने बतलाया की किसी भी देश के विकास के लिए वहां की भाषा को सुदृढ़ करना परम आवश्यक है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉक्टर सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा कि हिंदी के समुचित विकास के लिए हमें चौके और चौकी की बातों में एकरूपता लानी होगी। केवल 14 सितंबर को हिंदी की समृद्धि एवं उसकी विशेषता पर चिंतन कर हम हिंदी को समृद्ध नहीं बना सकते बल्कि इसके लिए हमें अपने बच्चों में हिंदी के प्रति जागरूकता लानी होगा।इस कवि सम्मेलन में जनार्दन मिश्र जलज, प्रेमशंकर प्रेमी, अनुज बेचैन, संजय मिश्र अणु, सुषमा सिंह इत्यादि कवि-कवयित्रियों ने भी अपनी-अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
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