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मंथन

मंथन

   ------- विधुशेखर मिश्र
दहशत और भय व्याप्त है
समाज में, प्रान्त में और देश में
सब आर्त्त हैं, सहमे हैं,भयाक्रान्त हैं
चारो ओर खौफ है,अव्यवस्था है।
सब इसका परिणाम  जानते हैं 
फिर भी यह कैसी धृष्टता है ?
यह कैसा मंज़र  है, कैसी परीक्षा है ?
बेबस हैं, लाचार हैं यह समीक्षा है।
बचने लगे हैं लोग एक दूसरे के स्पर्श से
यह कैसा जीवन, कैसी जिजीविषा है ?
इतिहास के पन्नों में बेशक दर्ज होंगे 
आज के संयमित जीवन के विविध टिप्स
गिलोय सत्त्व और तुलसी पत्र के बहुविध लिस्ट
स्वर्णाक्षरों में लिखा जायेगा अहम सूत्र
"दो गज दूरी मास्क जरूरी" का महामंत्र।
कड़क चाय की जगह पीना होगा
कड़वा काढ़ा व उष्ण शोधित जल
और तैयार करने होंगे छतनार वृक्ष
ताकि जीवन पर्यन्त होती रहे शुद्ध हवा की पूर्त्ति
तब जाकर हो पायेगी कुछ हद तक आत्मसंतुष्टि।
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