मोबाइलगीत(नवजात)
जो मोबाइल सेट देता प्यार हमको,
वह नहीं देगा कभी हर्गिज जमाना।
जोड़ता है तार सबसे एक पल में
है दिखाता दृश्य भी अनुपम सुहाना।।
ज्ञान का भण्डार है, रस का खजाना,
हर तरह के चैनलों का शाहजादा।
मित्रता बढ़ती जहाँ से, शत्रुता भी
सीख लो, जो सीखने का है इरादा।।
विश्व में कब क्या हुआ झट जान लोगे,
चन्द मिनटों में जमीं को छान लोगे।
आसमां भी तो खबर दिल खोल देगा,
पाठ पढ़ इससे नई पहचान लोगे।।
नौकरी भी चाहिए तो ढूँढ़ सकते,
चाह है व्यापार तो गुर सीख लोगे।
शास्त्र सब, शस्त्रास्त्र सब, नेकी-बदी भी,
जो समझना समझ लो, विद्वान होगे।।
बैठकर घर पर खरीदारी करोगे,
नग्नता का भी खुला दर्शन करोगे।
क्या अधिक कहना खरीदो एक-दो मत,
पाँच कम से कम, बड़ा बनकर रहोगे।।
दो, किशोरों, बालकों, शिशुओं, युवा को
औरतों को भी, नहीं हकदार क्या हैं?
काम असली छोड़ सब उलझे रहेंगे,
है मोबाइल, साथ फिर दरकार क्या है?
साथ खाना, साथ पीना चाहते हो,
साथ में जोड़ो सभी हैं पास देखो।
दूरदेशी इष्ट-मित्रों से जुड़ोगे,
दूर को भी पास का अहसास देखो।।
क्या कहूँ! जबसे मोबाइल हाथ आया,
अब मशीनी जिन्दगी भी हो गई है।
स्वप्न का बाजार फैला है चतुर्दिक्साथ की अनुभूति असली खो गई है।।
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