पटना का मानव भारती विद्यालय बच्चों को न सिर्फ शिक्षित करता है अपितु वे कैसे संस्कारित बने |
पटना का मानव भारती विद्यालय बच्चों को न सिर्फ शिक्षित करता है अपितु वे कैसे संस्कारित बने इसका भी ख्याल रखता है | मानव भारती के संचालक श्री प्रदीप मिश्र ने बतायाकि वैसे तो संस्कारों और संस्कारों की सुन्दरता के महत्व की पहली कड़ी घर ही होता है यही से शुरू होती है बच्चों की पहली शिक्षा । घर से ही बच्चों के संस्कार की शुरूआत होती है। अभिभावकों को इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए। इसके बाद दूसरी जिम्मेदारी स्कूल के शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं की होती है, जो बच्चों के अच्छे संस्कारों का बोध कराते हैं। सिर्फ संस्कार ही नहीं, बल्कि इसके बारे में जानकारी भी होनी चाहिए। हमारे संस्कार अच्छे हैं और हमें अच्छे या खराब की जानकारी नहीं है, तो इसका महत्व नहीं रहता। लिहाजा, संस्कारों का ज्ञान और उनकी सुन्दरता ही हमें उन्नति के लिए प्रेरित करती है। यदि संस्कारों की एक कड़ी शुरू हो जाती है तो फिर इसमें निरंतरता बनी रहती है और यही अच्छा समाज बनाने सहायक होती है। प्रबल संस्कार से शिक्षा पल्लवित होगी। वर्तमान समय में यह महसूस किया जा रहा है कि जैसे-जैसे शिक्षित नागरिकों का प्रतिशत बढ़ रहा है, वैसे-वैसे समाज में जीवन मूल्यों में गिरावट आ रही है। हमें मूल्यों के सौंदर्य का बोध होना चाहिए। विद्यार्थी जो देश का भविष्य हैं वे तनाव, अवसाद, बाहय आकर्षण और अनुशासनहीनता के शिकार हैं। इसका कारण पाश्चात्य संस्कृति, विद्यालय या समाज ही नहीं, बल्कि संस्कारों के प्रति हमारी उदासीनता है। परिवार बालक की प्रथम पाठशाला है तो माता-पिता प्रथम शिक्षक। विद्यालय में हम देख रहे हैं कि जो माता-पिता अपने बच्चों में अच्छे संस्कार आरोपित करते हैं वे वाह्य वातावरण से प्रभावित हुए बिना शिक्षक द्वारा दी गई विद्या को फलीभूत करते हैं। अत: परिवार में प्रत्येक सदस्य का दायित्व है कि बच्चों में भौतिक संसाधनों के स्थान पर संस्कारों की सौगात दें। मेरे विचार में संस्कार हमारे जीवन में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं, जीवन का प्रथम चरण है विद्यार्थी काल और विद्यार्थी में पांच लक्षणों को संस्कार के रूप में आरोपित करने का प्रयत्न किया जाता है। निरंतर प्रयास, एकाग्रता, अल्पनिद्रा, अल्पहार, घरेलू बातों में अनाकर्षण इन संस्कारों से युक्त विद्यार्थी हमेशा तनाव मुक्त रहता है। इन संस्कारों को अपने जीवन में अपनाकर विद्यार्थी अपने जीवन पथ पर अग्रसर होता है एवं भावी जीवन में सफल होने के योग्य बनता है, जिससे उसका वर्तमान एवं भविष्य दोनों में ही सुधार हो सकता है। यही हमारे संस्कारों का बोध भी है। साथ ही सामाजिक छवि किस प्रकार की बनें, यह भी हमारे संस्कारों पर ही निर्भर करता है। संस्कारों के सौंदर्य के ज्ञान के बिना हम आगे नहीं बढ़ सकते। संस्कार और शिक्षा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। न तो संस्कारों के बिना अच्छी शिक्षा की कल्पना की जा सकती है और न ही शिक्षा के बिना अच्छे संस्कार आते हैं। वातावरण में तमाम व्यावहारिक अशुद्धियां होती हैं। यह तो हम पर निर्भर करता है कि हम किसका अनुशरण करें। संस्कारों का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। शिक्षा के क्षेत्र में संस्कार एक महत्वपूर्ण कड़ी है। यह हमें जीवन में रहने का तरीका बताता है। शिक्षा का बोझ हम संस्कारों से कम कर सकते हैं। अपने सहपाठकों के साथ बैठकर तथा अपने माता-पिता के साथ बैठकर विनम्रता के साथ बात करके हम इसको कम कर सकते हैं। दिव्य रश्मि ! धर्म, राष्ट्रवाद , राजनीति , समाज एवं आर्थिक जगत की खबरों का चैनल है | जनता की आवाज़ बनने के उदेश्य से हमारे सभी साथी कार्य करते है अत: हमारे इस मुहीम में आप के साथ की आवश्यकता है |हमारे खबरों को लगातार प्राप्त करने के लिए हमारे चैनल को सबस्क्राइब करना न भूले और बेल आइकॉन को अवश्य दबाए | चैनल को सब्सक्राइब करें खबर को शेयर जरूर करें Facebook : https://ift.tt/3mi8FgA Twitter https://twitter.com/DivyaRashmi8 instagram : https://ift.tt/35ARrp0 visit website : https://ift.tt/3d6mwRK
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