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बिजली विभाग का अजब-गजब खेल

बिजली विभाग का अजब-गजब खेल

सारण से हमारे संवाददाता विजय कुमार सिंह की खास रिपोर्टर 
मिली जानकारी के अनुसारशहर हो या गांव अमीर हो या गरीब बिजली आज मूलभूत सुविधा में शामिल है इसके करना में की खुलासा तत्कालीन मुख्यमंत्री मा0 जीतन राम माझी मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए किए थे! ऐसे ही घटनाएं मांझी प्रखंड के विभिन्न गांवों से आ रही है सुदर्शन महतो दुमदुमा उपभोक्ता संख्या 20 20 12 12 4 200 68553 बताते हैं कि मुझे बीपीएल योजना के अंतर्गत निःशुल्क कनेक्शन दिया गया था! शुरू में तो बिल विपञ आया नहीं दो-तीन साल पहले मीटर लगा और एका एक 81,668रु0 का बिल आया है साथ ही 15 दिन का समय दिया गया है अन्यथा विद्युत संबंध विच्छेद कर दिया जाएगा गरीब परेशान हैं कि एका एक इतनी राशि कहां से आएगा यदि पहले ही यह बिल आया होता तो आज हमें परेशानी नहीं होती शुरू में बताया गया कि नि शुल्क बल्ब जलाना है! बिजली विभाग के कर्मचारी की लापरवाही का खामियाजा हमें भुगतना पड़ रहा है! माया देवी मदन साठ बताती है कि मै बिजली बिल उपभोक्ता संख्या 124 200 3 6853 का बिल शुरू से जमा करती आ रही हू! जिसका ₹170 बकाया था 2 माह पहले बिजली विभाग के दो व्यक्ति आए थे और बोले कि मीटर खराब हो गया है बदलवा लीजिए और वेलोग मीटर बदल दिए जिसकी एवज मे ₹200 लिए और इस माह एक दूसरा बिल उपभोक्ता संख्या 1242 00 13 466 से बकाया राशि ₹19932 आया है वह परेशान है कि एक घर में दो-दो बिजली का बिल कैसे आ गया ! इसी प्रकार राजेंद्र सिंह बंगरा बताते हैं कि 6-6-2019 को मैंने बिजली विपत्र सुधर वाने के संबंध में कनीय विद्युत अभियंता के पास लिखित आवेदन दिया था उसके बाद कितनी बार मौखिक शिकायत भी किया लेकिन कोई प्रभाव नहीं पड़ता है रामजी सिंह भी 19-9-19 को बिल विपत्र सुधार ने हेतु आवेदन दिए थे लेकिन वह भी कहते हैं कि कोई कार्रवाई नहीं की गई नहीं विभाग के द्वारा जांच किया गया सुदामा सिंह बंगरा बताते हैं कि मैंने तो विभाग से परेशान होकर विद्युत विच्छेदन का आवेदन दिया था लेकिन न तो बिधुत विच्छेदन किया गया और ना ही मीटर सुधार किया गया मैं बाहर रहता हूं जब घर पर आता हूं तो बिना मीटर पठन के ही बिल भेज दिया जाता है जिसे देखकर आश्चर्यचकित रह जाता हूं ! अंततः ये लोग कहते हैं बिजली विभाग को वहां के अधिकारी दुधारू गाय के रूप में देखते हैं और पूर्व मुख्यमंत्री मा0 जीतन राम मांझी के बयान के अनुसार ही आज भी कार्य होता है!
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