भारत सरकार सक्षम, लघु एवं मध्यम उद्धम विकास संस्थान,
पटना द्वारा प्राकृतिक स्टार्च आधारित बायोडिग्रेडेबल उत्पाद (थैला) विषय पर वेमिनार का
आयोजन।

भारत सरकार सक्षम, लघु एवं मध्यम उद्धम विकास संस्थान, पटना द्वारा DSCRD इनक्यूबेशन सेंटर के सहयोग से दिनांक 04.09.2020 को प्राकृतिक स्टार्च पर आधारित बायोडिग्रेडेबल उत्पाद (थैला) विषय पर एक वेमिनार का आयोजन किया गया। पॉलीमर आधारित पॉलिथीन से बने थैले आधुनिक जीवनशैली का अभिन्न अंग बन चुका है और यह पर्यावरण के लिए कितना खतरनाक हो गया है सर्वविदित है। पर्यावरण की रक्षा एवं मानव के स्वास्थ्य के लिए प्रतिबंधित उपयोग आवश्यक है परंतु इसका बाजार स्थापित हो चुका है। प्राकृतिक पर आधारित बायोडिग्रेडेबल इसका एक बेहतर विकल्प के रूप में सामने आया है जो प्राकृतिक परिस्थितियों में अपघटनीये है। केला, मक्के इत्यादि के सह उत्पाद से बने थैले न सिर्फ सस्ते होते हैं बल्कि प्रदूषण रोकने एवं जमीन की उर्वरकता को भी बढ़ाते हैं यह थैले मिट्टी में डालने के खाद में परिवर्तित हो जाते हैं। प्रकृतिक स्टार्च पर आधारित बायोडिग्रेडेबल उत्पाद से न केवल थैले बल्कि एग्रीकल्चर रैप सीट्स, डाइनिंग रैप शीट्स, सीड पैकेजिंग बैग्स, फूड ग्रेड आइटम पैकेज, गार्बिज बैग्स, एक्सपोर्ट पैकिंग्स भी बनाए जा सकते हैं। इन्ही विशेषताओं को ध्यान में रखकर इस वेबीनार का आयोजन की गया है। कार्यकरम कि अध्यक्षता सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम विकास संस्थान पटना के निदेशक प्रोफेसर श्री विश्वमोहन झा ने किया । अपने संदेश में उन्होंने कहा कि आज पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन की समस्या से जूझ रहा है इसके कई कारण हो सकते हैं परंतु सिंगल यूज़ प्लास्टिक का उपयोग इसके सभी कारणों में प्रमुख है यह ना सिर्फ धरती की सतह के ऊपर रहकर गंदगी फैलाने में बलकि धरती की सतह के नीचे जाकर भी जमीन की उर्वरक शक्ति को कमजोर करता है इसकी वजह से आज पूरा विश्व जगह-जगह अपर्याप्त वर्षा, सामान्य तापमान, ग्लेशियर का पिघलना इत्यादि अनेक प्रकार की समस्याएं झेल रहा है इससे निजात पाने के लिए सिंगल यूज प्लास्टिक का एक बेहतर विकल्प प्राकृतिक स्टार्ट पर आधारित बायोडिग्रेडेबल बैग्स है। यह कार्यक्रम मुख्य रूप से इस उत्पाद की संभावनाओं को तलाशने के लिए आयोजित किया जा रहा है ताकि बिहार में इस पर आधारित नए उद्यमों का सृजन किया जा सके इससे ना सिर्फ कोरोना काल में बेरोजगारी की समस्या से लड़ने में सहायता मिलेगी बल्कि एक इनोवेटिव उत्पाद का विकल्प मिलेगा उन्होंने सभी उधमियों एवं युवाओं बाँकों एवं अन्य स्टैक होल्डर्स से इस उद्धम को बढ़ावा देने के लिए अपील किया।
इस मौके पर डीएसपीआरडी, इनक्यूबेशन सेंटर के अध्यक्ष श्री संजीव श्रीवास्तव ने कहा कि लॉकडाउन से उत्पन्न विपरीत परिस्थितियों से निजात पाने के लिए अब बहुत ही आवश्यक हो गया है कि बिहार के उद्यमी एवं युवा नए प्रकार के उद्यमों की राह पर आगे बढ़े तभी बिहार आत्मनिर्भर बन सकता है इसके लिए बिहार के युवाओं में उद्यमी बनने की ललक जगाने की आवश्यकता है बायोडिग्रेडेबल उत्पाद का प्लांट लगाकर उद्यमी बनने और आपदा को अवसर में बदलने का यह बेहतर मौका है भारत सरकार एवं राज्य सरकार के विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाते हुए युवाओं को प्लांट लगाने संबंधी इंजीनियरिंग मशीन, उद्योग से संबंधित प्रशिक्षण की आवश्यकता को पूरा करने में उनकी मदद करने को प्रतिबद्ध है।

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