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फैला गया है जहर

फैला गया है जहर (हिंदी ग़ज़ल)


क्या गांव क्या शहर?
फैला गया है जहर।१।
हम अपना कह सकें -
ऐसी कहां है नजर।२।
पास में है भूख,भय -
बोझ बना है सफर।३।
देख लो लहुलुहान-
रास्ते हैं किस कदर।४।
जो दिखती थी रौशनी -
आज गई है उतर।५।
साथ में जो लोग थे -
सबके सब गये गुजर।६।
सब रंग-ढंग देखकर -
आज हो गया है बेखबर।७।
मर गई खुशी "मिश्रअणु"
मायूसी बनी है हमसफ़र।८।
अब कुछ धुंआ उठता नहीं -
जो देख लेता है कहर।९।
     ---:भारतका एक ब्राह्मण.
       संजय कुमार मिश्र "अणु"
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