हिमालय से कन्याकुमारी तक
सुनील शुक्ला

हिमालय से कन्याकुमारी तक
पूरब से लेकर पश्चिम तक
हम समझते औ समझाते हैं
हर भारतवासी कि जिन्दगी है
हिन्दी भाषाओं की बिन्दी है
हम बच्चे मन के सच्चे हैं
हरपल मुस्काते रहते हैं,
दुनिया में कहीं भी जाते हैं
हिन्दी से पहचान बनते हैं।
वहां यही हमारी बंदगी है
हिन्दी भाषाओं की बिन्दी है।
लाल किले से तीरंगा फहराते
सभी को नई सीख दे जाते
गुरु जनों को शीश नवाते
यही ॐ की संजिन्दगी है
हिन्दी भाषाओं की बिन्दी है।
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