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हिन्दुओ, धर्म का पक्ष लेकर हिन्दू राष्ट्र की दिशा में बढो !

हिन्दुओ, धर्म का पक्ष लेकर हिन्दू राष्ट्र की दिशा में बढो !

‘नवम अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन’ में हिन्दुओं  को दिशादर्शन !



भारत आज जितना भीतरी और बाहरी संकटों से घिरा है, उतना स्वतंत्रता के 70 वर्षों में इससे पहले कभी नहीं था । एक ओर चीन-पाकिस्तान दोनों मिलकर भारत पर आक्रमण करने की तैयारी कर रहे हैं, तो दूसरी ओर देशविरोधी तत्त्व आंतकवादियों, नक्सलवादियों के इशारों पर देश में अराजकता मचाने को तैयार बैठे हैं । इस्लामिक स्टेट के सैकडों लोग कर्नाटक, तथा केरल में सक्रीय होकर देश में आत्मघाती गतिविधियों में संलग्न हैं, यह सामने आ रहा है । ऐसे में इन देशविरोधी प्रवृत्तियों को रोकना आवश्यक है । कोरोना महामारी के समय तब्लीगी जमात ने ‘कोरोना वाहक’ की भूमिका निभाई, जबकि हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों ने ‘कोरोना योद्धा’ की भूमिका निभाई । आजकल राजनीति, शिक्षाक्षेत्र, प्रसारमाध्यम, कलाक्षेत्र आदि सभी क्षेत्रों में ‘देशभक्त और धर्मप्रेमी’ विरुद्ध ‘देशद्रोही और धर्मविरोधी’ ऐसा ध्रुवीकरण हो रहा है । इस वैचारिक ध्रुवीकरण के काल में धर्म का पक्ष चुनकर हिन्दू राष्ट्र की दिशा में मार्गक्रमण करना आवश्यक है । भारत में बहुसंख्यक होकर भी हिन्दू स्वतंत्रता के 7 दशक उपरांत भी अन्याय, अत्याचार, पक्षपात और अपमान सह रहे हैं । हिन्दुआें की असंख्य समस्याएं हैं । जिनका एकमात्र उपाय है ‘हिन्दू राष्ट्र की निर्मिति ।’ यही ध्यान में रख हिन्दू जनजागृति समिति तथा सनातन संस्था विगत 8 वर्षों से गोवा में अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन के माध्यम से हिन्दुआें को संगठित करने हेतु अथक प्रयास कर रहे हैं । इसी कारण आज भारत सहित विदेश में हिन्दू राष्ट्र की चर्चा जोर-शोर से हो रही है । इसके लिए भारत, नेपाल, बांग्लादेश, इंडोनेशिया इन देशों के हिन्दुत्वनिष्ठ संगठन हिन्दू राष्ट्र निर्मिति के उद्देश्य से संगठित हुए हैं । इस बार कोरोना की वैश्‍विक महामारी के कारण यह अधिवेशन 30 जुलाई से 2 अगस्त और 6 से 9 अगस्त 2020 की अवधि में सायं. 6 से 9 के बीच ‘ऑनलाइन’ संपन्न हुआ । इन आठ दिनों में देश-विदेश के 280 हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों के प्रतिनिधि, अधिवक्ता, विचारक, संपादक, उद्योगपति आदि बडी संख्या में ‘ऑनलाइन’ उपस्थित थे । समिति के ‘यू-ट्यूब’ चैनल ‘hindujagruti’ और फेसबुक पेज ‘hinduadhiveshan’ द्वारा यह अधिवेशन 3 लाख 90 हजार से अधिक लोगों ने प्रत्यक्ष देखा ।

पूर्व एवं पूर्वोत्तर भारत में हिन्दुओं  के बढते धर्मांतरण की विदारक वास्तविकता !

विविध विषयों पर आयोजित ‘विशेष परिसंवाद’ इस अधिवेशन की विशेषता सिद्ध हुए । ‘मंदिरों की रक्षा’, ‘हिन्दू राष्ट्र की आवश्यकता एवं दिशा’ जैसे विविध विषयों पर विशेष परिसंवाद आयोति कर व्यापक विचारमंथन किया गया । ‘पूर्व अन् पूर्वोत्तर भारत में हिन्दुआें का बढता धर्मांतरण और उसका उपाय’ इस विषय पर आयोजित परिसंवाद में केंद्रशासन सर्वप्रथम धर्मांतरण हेतु विदेश से आनेवाले धन को रोककर राष्ट्रीय स्तर पर धर्मांतरण प्रतिबंधक कानून लागू करें, ऐसी मांग झारखंड में ‘तरुण हिन्दू’ के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. नील माधव दास ने की । त्रिपुरा स्थित शांती काली आश्रम के पू. स्वामी चित्तरंजन महाराज जी ने बताया कि हिन्दुआें का धर्मांतरण रोकने हेतु वे अधिकाधिक शिक्षा संस्थाएं आरंभ करने हेतु प्रयत्नशील हैं, वहीं बंगाल की शास्त्र धर्म प्रचार सभा के डॉ. कौशिकचंद्र मल्लिक ने बंगाल में धर्मांतरण बंदी सहित घुसपैठ रोकने, नागरिकता सुधार कानून लागू करने और धर्मशिक्षा देने की आवश्यकता प्रतिपादित की । इस समय मेघालय की सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती इस्टर खरबामोन ने ‘मेघालय में हिन्दुआें को पाठशाला, चिकित्सालय, सरकारी नौकरी, निवास, विवाह, विदेश यात्रा आदि से वंचित रखा जाता है; परंतु ईसाई एवं मुसलमानों को ये सभी सुविधाएं बडी मात्रा में दी जाती हैं; इसलिए हिन्दू धर्मांतरण करते हैं’ यह कडवी सच्चाई सामने रखी ।


हिन्दुआें पर हो रहे सभी प्रकार के अन्याय का एकमात्र उपाय है ‘हिन्दू राष्ट्र !’
आज समानता और धर्मनिरपेक्षता इन सिद्धांतों का उल्लेख कर शासन हिन्दुआें के मंदिरों का अधिग्रहण करता है; परंतु किसी भी मस्जिद अथवा चर्च का अधिग्रहण नहीं करता । हिन्दुआें को धार्मिक यात्राआें के लिए अनुदान नहीं दिया जाता; परंतु हज यात्रा के लिए करोडों रुपयों का अनुदान दिया जाता है । हिन्दुआें को धार्मिक शिक्षा देने का अधिकार नहीं है; परंतु अल्पसंख्यकों को धार्मिक शिक्षा के लिए अनुदान दिया जाता है । यह बहुसंख्यक हिन्दुआें पर किया गया घोर अन्याय है । यह अन्याय दूर करने हेतु हिन्दू राष्ट्र-स्थापना की आवश्यकता है, ऐसा हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे ने इस समय कहा ।



इसके अतिरिक्त अधिवेशन में ‘जिहादी आतंकवाद का प्रतिकार’, ‘राष्ट्ररक्षा’, ‘राष्ट्रविरोधी शक्तियों का प्रतिकार’, ‘सुराज्य अभियान’ आदि विषयों पर भी अनेक मान्यवर वक्ताआें ने अभ्यासपूर्ण जानकारी देकर वैधानिक मार्ग से संघर्ष करने का आवाहन किया । अधिवेशन के समापन सत्र में मान्यवर वक्ताआें और संतों के प्रतिपादन से हिन्दुआें को नीतिगत मार्गदर्शन मिला । इसके महत्त्वपूर्ण अंश आगे दिए हैं...


अयोध्या के उपरांत अब काशी, मथुरा... !

अधिवेशन में सहभागी प्रखर हिन्दुत्वनिष्ठ तथा तेलंगाना के भाजपा विधायक श्री. टी. राजासिंह ने हिन्दुआें का आवाहन करते हुए कहा कि ‘तिहरे तलाक पर प्रतिबंध, अनुच्छेद 370 हटाना और श्रीराममंदिर का निर्माण, ये 3 बातें पूर्ण हो गई हैं । अब केवल 3 बची हैं । वे हैं काशी में विश्‍वनाथ मंदिर और मथुरा में श्रीकृष्ण मंदिर बनाना तथा अंत में अखंड हिन्दू राष्ट्र की स्थापना ! इस हेतु छत्रपति शिवाजी महाराज और धर्मवीर संभाजी महाराज के मार्ग का अनुसरण करना होगा । अखंड हिन्दू राष्ट्र केवल बोलने से स्थापित नहीं होगा, उसके लिए प्रत्यक्ष आचरण करना होगा ।

राजनीति का हिन्दूकरण होना आवश्यक !


अयोध्या के ‘श्री रामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास’ के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेवगिरी महाराज ने कहा, ‘भारत स्वयंभू हिन्दू राष्ट्र है । छत्रपति शिवाजी महाराज ने भी हिन्दू साम्राज्य की स्थापना की । परंतु स्वतंत्रता के उपरांत सत्ताधारियों ने हिन्दूविरोधी विचारधारा अपनाई; अब आगे हिन्दू राष्ट्र अबाधित रखना, प्रत्येक हिन्दू का दायित्व है । इसके लिए वीर सावरकर द्वारा बताए अनुसार राजनीति का हिन्दूकरण होना आवश्यक है ।’


आपातकाल में स्वरक्षा होने हेतु भक्त बनें !

इस समय सनातन संस्था के धर्मप्रचारक सद्गुरु नंदकुमार जाधव जी ने कहा, ‘मेरे भक्तों का नाश कभी भी नहीं होगा’, यह भगवान का वचन है । शासनकर्ता भले ही साधन-सामग्री संपन्न हों, तब भी वे जनता की रक्षा नहीं कर पा रहे, यह हम स्वयं अनुभव कर रहे हैं । परंतु ईश्‍वर भक्त की पुकार पर दौडे चले आते हैं । इसलिए आगामी आपातकाल में अपनी रक्षा होने हेतु स्वयं ईश्‍वर के भक्त बनें और अन्यों की भी साधना में सहायता करें !’
कालमहिमा के अनुसार 2023 में होगी हिन्दू राष्ट्र की स्थापना !

हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगळे जी ने कहा, ‘वर्तमान आपातकाल में संसार तृतीय विश्‍वयुद्ध की दहलीज पर खडा है । कोरोना महामारी के काल में चीन के विरोध में अनेक देश एकजुट हो गए हैं । विश्‍वयुद्ध चालू होने पर, भारतविरोधी शक्तियों द्वारा जाति-धर्म के नाम पर गृहयुद्ध भडकाने के षड्यंत्र रचे जाने की पूरी संभावना है । इस भावी अराजक परिस्थिति का सामना करने हेतु हिन्दुत्वनिष्ठ अग्निशमन, प्रथमोपचार, आपातकालीन सहायता, नागरी सुरक्षा (सिविल डिफेंस) आदि आपातकालीन परिस्थिति संभालने का प्रशिक्षण लेने की आवश्यकता है । कालमहिमा के अनुसार वर्ष 2023 में हिन्दू राष्ट्र की स्थापना निश्‍चित होगी । इसमें योगदान देना, हमारी साधना ही है ।’


‘नवम अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन’ में पारित प्रस्ताव !

संविधान से ‘सेक्युलर’ शब्द हटाकर वहां ‘स्पिरिच्युअल’ शब्द जोडे तथा भारत को ‘हिन्दू राष्ट्र’ घोषित किया जाए । नेपाल को भी हिन्दू राष्ट्र घोषित किया जाए । अयोध्या में बननेवाला श्रीराममंदिर हिन्दुआें की धर्मशिक्षा का केंद्र बनाया
जाए । राममंदिर की भांति काशी, मथुरा आदि मंदिर मुक्त करने हेतु ‘प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991’, यह कानून तत्काल निरस्त किया जाए । देश में ‘समान नागरी कानून’, ‘गोवंश हत्या पर प्रतिबंध’, ‘धर्मांतरण पर प्रतिबंध’ तथा ‘हिन्दू देवताआें और श्रद्धास्थानों का अनादर रोकनेवाले’ कठोर कानून बनाएं । कश्मीर घाटी में ‘पनून कश्मीर’ यह स्वतंत्र केंद्रशासित प्रदेश बनाकर वहां विस्थापित हिन्दू कश्मीरियों को बसाएं । सभी मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करें । सब मंदिर भक्तों को सौंपे आदि अनेक प्रस्ताव इस अधिवेशन में पारित किए गए । राष्ट्र और धर्म रक्षा हेतु विविध विषयों पर कृति कार्यक्रम निश्‍चित करने हेतु ‘ऑनलाइन’ गुटचर्चा भी की गई ।

देश-विदेश से अधिवेशन में सम्मिलित हुए हिन्दुत्वनिष्ठों ने आगामी आपातकालीन परिस्थिति में हिन्दुआें की अर्थात एक प्रकार से देश की रक्षा करने की तैयारी दर्शाई । देश में लोककल्याणकारी हिन्दू राष्ट्र की स्थापना हो, इस हेतु सभी कटिबद्ध हैं और इस दिशा में संगठित रूप से कार्य करने का सभी ने निश्‍चय किया । हिन्दू राष्ट्र स्थापना की दिशा में मार्गक्रमण करने हेतु हिन्दू भाई अब तैयार हो रहे हैं, यह विश्‍वास इस अधिवेशन में प्रकर्षता से व्यक्त हुआ । 
जयतु जयतु हिंदुराष्ट्रम् ।
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