गंभीर कुपोषण के शिकार जो बच्चे इलाज के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र लाए जाते हैं, उनमें से अधिकांश बच्चों के कुपोषित होने का कारण उनकी मां की अज्ञानता हैं। ऐसे बच्चे अगर समय पर पोषण पुनर्वास केंद्र पहुंच जाएं तो उनकी जान बच जाती है। लॉकडाउन के बाद पुनर्वास केंद्र में आधा दर्जन गंभीर कुपोषित बच्चों को लाया गया। इनमें से दो बच्चे स्वस्थ हो चुके हैं, बाकी चार बच्चों का वजन बढ़ाने के लिए उन्हें पौष्टिक आहार दिया जा रहा है।
पोषण पुनर्वास केंद्र की प्रभारी कमरजहां खान ने बताया कि 6 माह बाद बच्चे को मां के दूध के अलावा ऊपरी आहार देना चाहिए, लेकिन कई बार डेढ़ से ढाई साल तक भी महिलाएं उन बच्चों को ऊपरी आहार नहीं देती हैं। पोषण पुनर्वास केंद्र में महिला को लगभग 15 दिन रखा जाता है। इस दौरान शासन की ओर से महिला के बैंक खाते में 1629 रुपए की राशि जमा कराई जाती है लेकिन मजदूरी का काम करने वाली महिलाएं इस राशि से संतुष्ट नहीं। वे अधूरे इलाज में ही उसे घर ले जाती हैं।
कोर्ट परिसर में मीडिएशन सेंटर तैयार, न्यायाधीश ने किया भवन का निरीक्षण
न्यायालय परिसर में मीडिएशन सेंटर बनकर तैयार हो गया है। मंगलवार को न्यायाधीश यशवंत मालवीय ने भवन का निरीक्षण कर तैयारियां देखी। इस दाैरान भवन निर्माण कंपनी के सदस्य अभिषेक तिवारी ने चल रहा है कार्यों की जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि न्यायालय में मीडिएशन सेंटर में अब पक्षकारों के मामलों समझाइश दी जाएगी। निरीक्षण के दौरान न्यायालय स्टाफ मौजूद था।
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source https://www.bhaskar.com/local/bihar/bhagalpur/piparia/news/ignorance-of-women-increasing-malnutrition-among-children-127490287.html

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