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मेयर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर फैसले में देरी, होने लगी राजनीति

मेयर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने के बाद से ही निगम की राजनीति में गरमाहट आ गई है। विपक्षी पार्षदों ने इस बार ऐसी लामबंदी की है, जिसमें सत्ताधारी खेमा पूरी तरह से फंसकर रह गया है। मेयर सीता साहू के स्तर पर अविश्वास प्रस्ताव की बाधा को दूर कर लिए जाने का दावा किया जा रहा है। वहीं, विपक्षी खेमा इस बार अपनी मजबूती के दावे कर रहा है। मजबूत एकता के साथ मेयर को कुर्सी से उतारने के लिए एकजुटता के दावे कर रहा है। वहीं, 17 जुलाई को लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर तीन दिन बाद भी कोई निर्णय नहीं हो पाया है। नगर निगम बोर्ड की बैठक में अब मेयर को बहुमत साबित कर अपनी कुर्सी बचानी है और वह इसके जोड़-घटाव में जुट गई हैं।
75 में से 41 पार्षदों ने किया हस्ताक्षर : मेयर के खिलाफ दूसरी बार आए अविश्वास प्रस्ताव पर 75 में से 41 पार्षदों ने हस्ताक्षर किए हैं। मतलब साफ है कि पार्षदों का बहुमत अभी मेयर के खिलाफ जाता दिख रहा है। वर्ष 2019 में जब मेयर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, तो उस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वाले मेयर गुट के ही कुछ पार्षद थे। हालांकि, इनमें से कई अब विरोधी बन चुके हैं। पिछली बार 29 जून, 2019 को मेयर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। इसी दिन मेयर ने पार्षदों की अधियाचना को स्वीकार कर निगम बोर्ड की बैठक बुलाने पर अपनी सहमति दी थी। और तो और मेयर की सहमति मिलते ही तत्कालीन नगर आयुक्त ने बैठक के आयोजन का अनुमोदन करते हुए नगर सचिव को बैठक की तिथि जारी करने का निर्देश दिया और तीन जुलाई 2019 को बैठक के आयोजन की घोषणा हो गई। यह सब एक दिन में हुआ।
23 को हो सकती है तिथि की घोषणा : इस बार आंकड़ों का अंकगणित गड़बड़ाया हुआ है तो चार दिन में भी तिथि का निर्धारण करने में दिक्कत हो रही है। इस संबंध में अभी किसी भी पक्ष की ओर से कुछ नहीं कहा जा रहा है। नियमों के अनुसार, मेयर व नगर निगम प्रशासन को सात दिनों में बैठक की तिथि का निर्धारण करने का अधिकार है। ऐसे में 23 जुलाई तक अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक बुलाने की तिथि की घोषणा हो सकती है। विपक्षी पार्षदों का कहना है कि सत्ता पक्ष पार्षदों का विश्वास खो चुका है। बैठक में इस बार बाजी पलटने वाली है। वहीं, मेयर गुट विपक्षी पार्षदों पर भ्रम फैलाने की बात कर रहा है। मेयर का भी दावा है कि अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक में पार्षद उनके ही पक्ष में खड़े रहेंगे।
तारीख तय नहीं होने पर विपक्ष बुला सकता है बैठक
नियमों के अनुसार, अधियाचना दिए जाने के सात दिन के भीतर अगर नगर निगम प्रशासन की ओर से बैठक बुलाकर अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग नहीं कराई जाती है तो फिर विपक्ष अपने स्तर पर बैठक बुला सकता है। मसौढ़ी में इस प्रकार का मामला सामने आ चुका है। ऐसे में 23 जुलाई तक का समय मेयर गुट के पास है। अगर इस तिथि तक बैठक की तिथि की घोषणा नहीं की जाती है तो विपक्षी गुट सात अगस्त को अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक कर सकता है। हालांकि, मेयर गुट इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न न होने का दावा भी कर रहा है।



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source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/decision-on-no-confidence-motion-against-the-mayor-delayed-politics-started-127535609.html

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