प्रशस्तिपत्र
राधामोहन मिश्र माधव
राधा - मोहन का ऐसा मिलन ,
बन गया दिव्यता का चलन ।
मिले न मिलेअमि पर रहन है तरल ।
बड़ा-सा हृदय , मेधा की गहराई ,
उच्छल न होते सुन कर बड़ाई ।
धीरज के स्वामी , स्वभाव भी है सरल ।
ज्ञान-सागर में गोते लगाते हुए ,
सत्य संधानते मुस्कुराते हुए ।
विपदा की भी पी लेते हैं कड़वा गरल ।
कष्टों का सहन , है विद्या व्यसन ,
विराग में भी राग रखते हैं गहन ।
हुई माधव उपाधि साहित्यिक सदन ।
गिरीन्द्रमोहन मिश्र ,
फोटजर्नलिस्ट ,
जी. एम. ईस्टेट
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