बुधवार है, भगवान गणेशजी
का दिन
पंडित श्रीकृष्ण दत्त शर्मा,
अवकाश प्राप्त अध्यापक
सी 5/10 यमुनाविहार दिल्ली
मित्रों आज बुधवार है, भगवान गणेशजी का दिन है, पहले गणेश भगवान की वंदना करेगें फिर आपको
कुछ काम की बातें बताऊगा!!!!!!!!
*जो सुमिरत सिधि होइ गन नायक करिबर बदन।
करउ अनुग्रह सोइ बुद्धि रासि सुभ गुन सदन॥
भावार्थ:-जिन्हें स्मरण करने से सब कार्य
सिद्ध होते हैं, जो गणों के स्वामी और सुंदर हाथी के मुख वाले
हैं, वे ही बुद्धि के राशि और शुभ गुणों के धाम
(श्री गणेशजी) मुझ पर कृपा करें॥
समय का प्रबंधन जीवन प्रबंधन का एक अहम्
हिस्सा माना जाता है, समय जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है, समय को हम सीमा में नहीं बाँध सकते परन्तु
समयानुसार अपने आपको व्यवस्थित कर आसमान को छूने की कल्पना जरूर कर सकते हैं, समय की बर्बादी हमारे जीवन को अव्यवस्थित तो
करती ही है साथ ये हमारे सपनों, हमारी मंजिल , हमारी आशाओं
के मार्ग में बाधक भी सिद्ध होती है।
समय को अपने सपनों के अनुकूल बनाने का
सर्वश्रेष्ठ माध्यम है समय का समुचित उपयोग, इस हेतु यह
आवश्यक हो जाता है कि छात्र जीवन में ही नहीं अपितु उम्र के हर पड़ाव में हम अपनी
दैनिक दिनचर्या की एक सारणी बना लें और उसी के अनुसार हम अपनी दैनिक जीवन की सभी
गतिविधियों को संपन्न करैं।
इसका सबसे अच्छा फायदा तो यह हो सकता है कि
हमारे द्वारा किये जाने वाले कार्यों के हमें हमारी आशानुरूप परिणाम प्राप्त हो
सकते हैं, सफल जीवन जीने के लिये समय का सदुपयोग या समय
प्रबंधन विशेष भूमिका निभाता है, वर्तमान परिस्थितियाँ जहां हर एक व्यक्ति
किसी न किसी तरह के शारीरिक या मानसिक तनाव से गुजर रहा है।
मानव को स्वयं के लिए समय के अभाव की स्थिति
पैदा कर दी है, इसका मुख्य कारण समय प्रबंधन के प्रति लोगों
में जागरूकता का न होना है, प्रत्येक मनुष्य जीवन में उंचाइयाँ छूना
चाहता है, वह अपने आपको समाज में उच्च मुकाम पर स्थापित
करना चाहता है, चाहे वह किसी भी भूमिका में रहे एक प्रशासनिक
अधिकारी, एक अच्छा व्यापारी, एक सर्वश्रेस्थ निर्देशक या फिर कोई और
रोजगार ही क्यों न हो।
इस उद्देश्य की प्राप्ति की ओर तो हर एक को
लालसा होती है पर वह यह नहीं जानता कि हम इन उद्देश्यों की प्राप्ति का मार्ग
कितना दुर्गम है, कठिनाईयों भरा है, यह पता ही नहीं होता कि जीवन को व्यवस्थित कर
ही हम इन मंजिलों को प्राप्त कर सकते हैं, जीवन
व्यवस्थित होता है समय प्रबंधन के साथ, यही एक मात्र
साधन है जो मनुष्य को उसके उद्देश्यों की ओर प्रस्थित करता है।
आज के युवा पीढ़ी की एक सबसे बड़ी समस्या है कम
प्रयास से कम समय में अधिकतम फल प्राप्ति का सपना देखना, या फिर हम कह सकते हैं शॉर्टकट के माध्यम से
अपने उद्देश्यों की पूर्ति करना, यह मार्ग मनुष्य को केवल गर्त की ओर ले जाता
है, इस मार्ग को अपनाकर मनुष्य स्वयं से धोखा
करता है, साथ ही वह यह भूल जाता है कि जो मार्ग उसने
चुना है वह सही है या फिर गलत?
सज्जनों! समय के सुप्रबंधन को सामान्य अर्थ
में हम कह सकते हैं कम से कम समय में अधिक से अधिक कार्यों को पूर्ण करना, इसका आशय हम यह निकाल सकते हैं कि हम जिन
कार्यों को समय सीमा में बाँध कर चलते हैं उनको सुनियोजित तरीके से पूरा करना ताकि
कार्यों के अंत के परिणाम हमारी आशाओं के अनुरूप आ सकें, कार्यों को समय की अवधि भीतर जल्दी से
निपटाना हानिकारक हो सकता है।
कार्य को निपटाते समय हो सकता है कि हम यह
भूल बैठें कि कार्य को पूर्ण करने की प्रक्रिया ठीक तरीके से अपनाई गयी भी या नहीं? इसके कारण वांछित परिणाम प्राप्त करना
मुश्किल होता है, समय प्रबंधन का अभाव हमारे भीतर कार्य को या
निर्णय को टालने की प्रवृति जागृत करता है, धीरे-धीरे हम
आलसी होते जाते हैं या कह सकते हैं हम दीर्धसूत्री होते जाते हैं, जो हमें हमारे उद्देश्यों से हमें भटका सकता
हैं।
समय प्रबंधन अनावश्यक समय बर्बादी को रोकता
है, साथ ही यह कार्य हेतु किये गये प्रयासों को
व्यर्थ नहीं होने देता, समय का प्रबंधन सफलता की गारंटी माना जाता है, समय प्रबंधन के एक मुख्य कड़ी हो सकती है
हमारे आसपास के सहयोगी, हमारे समय प्रबंधन का ये सभी हिस्सा हों तो
कम से कम समय में हम अधिक से अधिक कार्यों या निर्णयों को सफलतापूर्वक संचालित कर
सकते हैं।
इस प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है
कि हमारा हमारे सहयोगियों के प्रति रवैया कैसा है? क्या हम
उन्हें निर्णयों या कार्यों में शामिल कर सकते हैं? क्या वे उस
कार्य हेतु योग्य व सक्षम हैं? और क्या हम उन पर विश्वास कर सकते हैं? सहयोगियों का साथ सफलता का सूचक बन सकता है।
प्रत्येक सफल प्रयास के बाद हमारा यह कर्तव्य
हो जाता है कि हम उन्हें उनकी उपलब्धियों के लिए समय-समय पर प्रोत्साहित करते रहें, उन्हें पुरस्कृत करते रहें ताकि भविष्य में
भी उनके दिलों में यही भावना विकसित होती रहे, सफलता की उड़ान
स्वयं की सोच का परिणाम हो सकती है, पर यह प्रयास
होने चाहिए कि इस राह में जो भी आपकी सफलता में भागी बनते हैं उनको भी इसका श्रेय
दिया जायें।
मित्रों! स्वयं के प्रयास तभी फलीभूत होता है
जब आप समय का प्रबंधन करते हैं, यही आपकी सफलता की प्रथम सीढ़ी है, यही सफलता का सूचक है, मित्रों! आज के पावन दिवस की पावन सुप्रभात्
आप सभी के लिये मंगलमय् और आनन्दमय् हो, भगवान् श्री
गणेशजी आप सभी की मनोकामनायें पूर्ण करें।
जय श्री गणेश!
ओऊम् गं गणपतये नमः
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