महाराष्ट्र के पालघर तहसील में हुए संत की निर्मम हत्या पर शब्द समर्पण!
रहा भारत अभिमानी!
संजय कुमार मिश्र"अणु"-------------------------
सुन!नराधम,अभिमानी,
तेजपुंज गौरवशाली-
रहा भारत है अभिमानी।।
सनातन धर्म पर देखो प्रहार हो रहा है।
साधु,संत,ब्राह्मणों का नरसंहार हो रहा है।।
और छाई मुर्दानी।।
देवता आज कांप रहे दानवी अट्टहास से।
धंस रही है धरा पापियों के संत्रास से।।
कहां है गुमानी।।
नारियों को छोडो बच्चियां दबोची जा रही है।
सुरक्षित जगह भी खुलेयाम नोची जा रही है।।
हो पानी पानी।।
आज भुजबल सुप्त है और जनबल लुप्त है,
त्याग,तप,तितिक्षा घर घर से जो विलुप्त है,
कथा और कहानी।।
हमें बनना होगा परसुराम या फिर चाणक्य,
जो आतातायी को मार सके हो निःशक्य,
विजित राजधानी।।
हम कायर-पामर,भीत नहीं बल्कि सहिष्णु हैं,
महाकाल हैं प्रलयंकर हम न केवल विष्णु हैं,
त्रिकाल ध्यानी।।
हम परसुराम के वंशज, हैं विश्वामित्र ऋषि वशिष्ठ,
जब बढता है क्रोध मेरा फिर बचता नहीं उच्छिष्ट,
मानी,राजा,रानी।।
---:भारतका एक ब्राह्मण.
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