Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

उठा हुआ तूफान!!

उठा हुआ तूफान!!
----------------------


अंदर बाहर देख रहा हुं-
उठा हुआ तूफान!!१!!
      अपने लोग पराये बनते,
      हंसते उपर भीतर जलते,
      भागम-भागी चलते-चलते-
      करते दंड परनाम!!२!!
आते-जाते हीं रहना तुम,
बैठे रहते हो क्यों गुमसुम,
छली मोहिनी बन कर कुमकुम-
बस दिखावा पहचान!!३!!
       एक साम तो आव भगत है,
       अनमनस्यक दूसरी साम,
        आना बडा भला लगा है-
       हंस कर कहते श्री मान!!४!
अच्छा-अच्छा का होश उडा है,
देखो तो "मैं" कहां खडा है,
उल्टा-सीधा अडा-पडा है-
याकि खडा निशान!!५!!
       कहना छिपा तीर्थ में आना,
       बस फोकट का माल उडाना,
       एक काम बस आना-जाना-
       व्यर्थ बने मेहमान!!६!!
अंदर-बाहर देख रहा हुं-
उठा हुआ तूफान!!
      ---:भारतका एक ब्राह्मण.
        संजय कुमार मिश्र"अणु"