उठा हुआ तूफान!!
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अंदर बाहर देख रहा हुं-
उठा हुआ तूफान!!१!!
अपने लोग पराये बनते,
हंसते उपर भीतर जलते,
भागम-भागी चलते-चलते-
करते दंड परनाम!!२!!
आते-जाते हीं रहना तुम,
बैठे रहते हो क्यों गुमसुम,
छली मोहिनी बन कर कुमकुम-
बस दिखावा पहचान!!३!!
एक साम तो आव भगत है,
अनमनस्यक दूसरी साम,
आना बडा भला लगा है-
हंस कर कहते श्री मान!!४!
अच्छा-अच्छा का होश उडा है,
देखो तो "मैं" कहां खडा है,
उल्टा-सीधा अडा-पडा है-
याकि खडा निशान!!५!!
कहना छिपा तीर्थ में आना,
बस फोकट का माल उडाना,
एक काम बस आना-जाना-
व्यर्थ बने मेहमान!!६!!
अंदर-बाहर देख रहा हुं-
उठा हुआ तूफान!!
---:भारतका एक ब्राह्मण.
संजय कुमार मिश्र"अणु"

