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क्या संतो के लिए सुरक्षित नहीं रहा महाराष्ट्र ?


क्या संतो के लिए सुरक्षित नहीं रहा महाराष्ट्र ? डॉ राकेश दत्त मिश्र
महाराष्ट्र के पालघर में जूना अखाड़े के दो साधुओं की निर्मम हत्या कर दी गई . एक वो समय भी हुआ करता था जब देश भर के और दुनिया भर के प्रताड़ित साधू , संत और हिन्दू समाज के लोग महाराष्ट्र के गौरवशाली योद्धाओं से सुरक्षा पाते थे जिनकी भुजाओं और तलवारोंके दम पर अब तक हिन्दू संस्कृति अपने मूल रूप में बची हुई है. कभी संतो को सम्मान और सुरक्षा देने वाले महाराष्ट्र के पालघर स्थित तलासरीअहमदाबाद हाईवे पर  साधु-संतों की गाड़ी पर विधर्मियो द्वारा सोच समझ कर ऐसा हमला किया जिससे उन संतो की हत्या हो गई और उन्हें ले जा रहा ड्राइवर भी उसी हमले में मारा गया . चुकी यह घटना विधर्मियो के द्वारा अंजाम दिया गया इसलिए विधर्मियो की गुलाम राज्य सरकार भी कोई करवाई नहीं की , अगर यह घटना किसी विधर्मी के साथ घटित होती तो अब तक देश में लोग करोना की प्रवाह नहीं करते वल्कि दंगे करते दिखाई देते|
महाराष्ट्र में इस से पहले संतो कोनिशाना बनाने की ऐसी घटना बहुत कम देखने को मिली थी. ध्यान ये भी देने योग्य है कि दो दिन पहले मुंबई के दहिसर से दो संत जो आपने गुरुभाई संत रामगिरी महाराज जी का सूरत मे उनके आश्रम में निधन हो गया. उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए उनके श्री सुशील गिरी व उनके ज्येष्ठ गुरु चिकना बाबा अपने ड्राइवर के साथ अहमदाबाद नेशनल हाईवे इलाके से गुज़र रहे थे कि आगे पालघर स्थित तलासरी कासा गांव में गाड़ी रुकवा कर विधर्मियों ने उन संतो को धारदार हथियार,लकड़ी तलवार से हमला करना शुरू कर दिया. इतना ही नहीं , उनके पास जो भी नकदी थी उसको भी छीन लिया गया. लाक डाउन में पुलिस की गश्त की पोल भी यहाँ खुलती दिखाई दी क्योकि इस पूरे हंगामे में काफी देर तक पुलिस का कोई नामोनिशान तक नहीं था.

जब शोर ज्यादा मचा तो घटना स्थल पर पहुंच कर पुलिस ने उन संतो को कुछ देर तक स्थानीय पुलिस चौकी में रखा फिर अपनी जीप में बिठाया. लेकिन विधर्मियो ने पोलिस से हाथापाई कर सभी संतो को हथियारों से तबतक मारा जब तक उनके प्राण पखेरू नहीं उड़ गये .. बताया ये भी जा रहा है कि पुलिस अगर उन दोनों संतो को और कुछ समय तक पुलिस चौकी के अंदर बैठा कर रखती और कंट्रोल रूम से अतिरिक्त पुलिस बल की मदद मांगती तो उन सभी संतो की जान बच सकती थी. इसी के चलते कहीं न कहीं इस घटना मे महाराष्ट्र पुलिस की भूमिका के ऊपर भी एक बहुत बड़ासवाल खड़ा हो रहा है.

आज भी शिवसेना जो विधर्मियो के साथ मिलकर सरकार चला रही है,  उसने  पूज्य बाला साहब ठाकरे के आदर्शो को जीवित रखा जैसे बालासाहब के  हुंकार से विधर्मी खौफ खाते थे ठीक उसी प्रकार घटना के आठ घंटे के अंदर ही पुलिस ने 110 लोगों के ऊपर मामला दर्ज किया गया है | लेकिन  हमारा सरकार से मांग है विधर्मियों को ऐसी सजा दी जाये जिससे वो कभी हमारे साधू संतो पर हाथ डालने से पहले सोचें | महाराष्ट्र की सरकार ने तो त्वरित करवाई की परन्तु हिन्दुओ के ठेकेदार समर्थित पार्टी की सरकार जो बिहार में चल रही है उसमे आये दिन संतो और ब्राहमणों की हत्या की जा रही है और प्रशासन मौन शाधे कुंभकर्ण के जैसी सोई है |