आठवीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा में उमड़ा जनसमूह, वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को किया याद
पटना। समाज के लिए समर्पित जीवन, गांधीवादी विचारधारा, सकारात्मक चिंतन और दूरदर्शी नेतृत्व के प्रतीक पंडित अनंत देव मिश्र की आठवीं पुण्यतिथि पर स्थानीय डॉक्टर विवेकानंद पथ, गोल बगीचा में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में सामाजिक, राजनीतिक, साहित्यिक, शैक्षणिक एवं धार्मिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने उपस्थित होकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व का स्मरण किया।
श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने पंडित अनंत देव मिश्र को समाज का एक ऐसा आलोक स्तंभ बताया, जिनका संपूर्ण जीवन सामाजिक चेतना, जनसेवा, राष्ट्रहित और ग्रामीण विकास के लिए समर्पित रहा। वक्ताओं का कहना था कि वे केवल एक राजनीतिक व्यक्तित्व नहीं थे, बल्कि समाज को दिशा देने वाले प्रेरणास्रोत, सकारात्मक सोच के धनी और भविष्य की चुनौतियों को समझने वाले दूरदर्शी जननेता थे।
पंडित अनंत देव मिश्र का व्यक्तित्व अनेक विशिष्टताओं से परिपूर्ण था। वे कट्टर गांधीवादी विचारधारा के अनुयायी थे और संत विनोबा भावे के विचारों एवं भूदान आंदोलन से गहरे प्रभावित थे। राष्ट्रीय राजनीतिक आंदोलनों में उनकी सक्रिय भूमिका रही। बिहार के सहकारिता आंदोलन को मजबूत बनाने तथा कांग्रेस संगठन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के कारण उन्हें एक प्रभावशाली जननेता के रूप में जाना जाता था।
उनका योगदान राजनीति तक सीमित नहीं था। सामाजिक, शैक्षणिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्रों में अनेक संस्थाओं की स्थापना, संरक्षण और सहयोग में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वे मानते थे कि समाज का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब शिक्षा, सामाजिक समरसता, आर्थिक आत्मनिर्भरता और ग्रामीण जीवन का उत्थान एक साथ आगे बढ़ें। यही कारण था कि ग्रामीण समाज की समस्याओं के समाधान और गांवों के सर्वांगीण विकास के लिए वे जीवनपर्यंत संघर्षरत रहे।
श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित लोगों ने कहा कि पंडित अनंत देव मिश्र की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सकारात्मक सोच, दूरदर्शिता और लोगों को साथ लेकर चलने की क्षमता थी। वे अपने विचारों को केवल भाषणों तक सीमित नहीं रखते थे, बल्कि उन्हें व्यवहार में उतारने का प्रयास करते थे। उनकी जनसेवा की भावना, सरलता, विद्वता, सामाजिक दायित्वों के प्रति प्रतिबद्धता और लोककल्याण की भावना आज भी लोगों के लिए अनुकरणीय है।
वक्ताओं ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके पद, प्रतिष्ठा अथवा राजनीतिक प्रभाव से नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों पर छोड़ी गई उसकी सकारात्मक छाप से होती है। इस दृष्टि से पंडित अनंत देव मिश्र का जीवन और उनका सामाजिक योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उनके द्वारा स्थापित सामाजिक मूल्यों और सेवा की परंपरा को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
सभा में यह भी कहा गया कि आज जब समाज को नैतिक मूल्यों, सामाजिक समरसता, सकारात्मक नेतृत्व और रचनात्मक चिंतन की आवश्यकता है, तब पंडित अनंत देव मिश्र जैसे व्यक्तित्वों का जीवन नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। विशेषकर ग्रामीण जीवन के उत्थान, सहकारिता की भावना और सामाजिक एकजुटता के क्षेत्र में उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं।
इस अवसर पर बिहार के प्रख्यात साहित्यकार एवं कवि आचार्य राधा मोहन मिश्र 'माधव', ऑल इंडिया जूलॉजी साइंस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. बी.एन. पाण्डेय, म.वि. प्रो. उमेश चंद्र मिश्र, डॉ. चंद्रशेखर मिश्र, डॉ. मंटू मिश्रा, गजाधर लाल पाठक, विनोद कुमार उपाध्याय, राघवेंद्र नारायण यादव, शंभू गिरी, आचार्य अरुण शास्त्री, मधुप किरण पाठक, डॉ. ज्ञानेश भारद्वाज, गुप्तेश्वर ठाकुर, अमित गोस्वामी, डॉ. जेयाउद्दीन, राम भजन दास, रामाज्ञान सिंह, नीलम देवी, रवि कुमार, दीपक पाठक, पवन मिश्र, रंजीत पाठक, कुमारी अमृता शर्मा, पूजा कुमारी, अनिता कुमारी, मृदुला मिश्रा, अनुपमा ज्ञानेश, मेघा मिश्र, प्रियांशु मिश्रा, अजय कुमार मिश्रा, सुनील कुमार एवं संजय दास सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
श्रद्धांजलि सभा का मूल संदेश यही रहा कि पंडित अनंत देव मिश्र भले ही आज हमारे बीच शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, सामाजिक सरोकार, जनसेवा के आदर्श और सकारात्मक नेतृत्व की स्मृतियां समाज के बीच जीवंत हैं। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों को लोककल्याण और सामाजिक उत्थान के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता रहेगा।
— डॉ. विवेकानंद मिश्र
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