हर घर-द्वार हो, सुख-समृद्धि, आरोग्य अपार

हर घर-द्वार हो, सुख-समृद्धि, आरोग्य अपार

कुमार महेंद्र
दीपमालिका पर्व अनुपम,
सर्वत्र हर्ष, उमंग, उल्लास।
मिटे तिमिर, नैराश्य दूर हो,
जन-जन के अंतर्मन में प्रकाश।
पंचपर्वीय श्रृंखला का शुभारंभ,
धनतेरस का मंगल उपहार।
हर घर-द्वार हो, सुख-समृद्धि, आरोग्य अपार।।


भगवान धन्वंतरि प्रकटे,
लिए अमृत का दिव्य कलश।
लक्ष्मी-कुबेर की आराधना से,
मिले सुख, वैभव और सुयश।
यमदीप प्रज्वलित कर वंदन,
दीर्घायु का हो मंगल संचार।
हर घर-द्वार हो, सुख-समृद्धि, आरोग्य अपार।।


धनतेरस की पावन बेला,
देव चिकित्सक का अवतरण।
आयुर्वेद दिवस का आयोजन,
स्वास्थ्य चेतना का संवर्धन।
स्वस्थ काया अनमोल निधि है,
जीवन का सर्वोत्तम आधार।
हर घर-द्वार हो, सुख-समृद्धि, आरोग्य अपार।।


नव कार्यों का श्रीगणेश हो,
प्रगति-पथ पर बढ़ते जाएँ।
शुभ संकल्पों के दीप जलाकर,
जीवन में सद्भाव जगाएँ।
सहृदय मंगलकामनाएँ लेकर,
खुशियों से महके घर-संसार।
हर घर-द्वार हो, सुख-समृद्धि, आरोग्य अपार।।


कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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