जवानी

जवानी

अरुण दिव्यांश 
जान है जवानी में ,
जानता जहान है ।
समझा जीवन को ,
वही तो महान है ।।
बचपन बचपन में ,
किशोर नादान है ।
जवानी दिवानगी ,
जवानी पहचान है ।।
पहचान जवानी ये ,
जवानी ही ज्ञान है ।
जवानी ही सार्थक ,
जवानी ही ध्यान है ।।
जवानी जानने योग्य ,
जवानी ये जवान है ।
जवानी जीवन मध्य ,
जवानी बेजुबान है ।।
जवानी है ईर्ष्या द्वेष ,
जवानी न अंजान है ।
जवानी जीवन रहस्य ,
जवानी ये भगवान है ।।

पूर्णतः मौलिक एवं 
अप्रकाशित रचना 
अरुण दिव्यांश 
छपरा ( सारण )
बिहार ।
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