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माँ ब्रह्मचारिणी की साधना से, जीवन-पथ ज्योतिर्मय


(शारदीय नवरात्र _द्वितीय दिवस)

माँ ब्रह्मचारिणी की साधना से, जीवन-पथ ज्योतिर्मय

कुमार महेन्द्र
नवरात्र की द्वितीया बेला,
भक्ति-सुगंध चहुँ ओर।
श्रद्धा के दीप जगमग करते,
मन में उमंग की भोर।
तप, त्याग, संयम की देवी,
महिमा शुभ मंगलमय।
माँ ब्रह्मचारिणी की साधना से, जीवन-पथ ज्योतिर्मय।।


श्वेत वसन, कर जपमाला,
कमंडल की छवि न्यारी।
तप की उज्ज्वल आभा से,
जगमग दुनिया सारी।
कष्ट मिटें, संताप हरें,
कृपा बरसे, जीवन सुखमय।
माँ ब्रह्मचारिणी की साधना से, जीवन-पथ ज्योतिर्मय।।


शिव को पाने हेतु मैया,
कठिन उपासना की।
अटल निष्ठा, दृढ़ संकल्प से,
सार्थक साधना की।
त्याग, तपस्या और संयम,
जीवन के शुभ आश्रय।
माँ ब्रह्मचारिणी की साधना से, जीवन-पथ ज्योतिर्मय।।


ज्ञान-ज्योति अंतर्मन जागे,
दूर हो अज्ञान अँधेरा।
आत्मबल और धैर्य बढ़े,
आशा का हो सवेरा।
सदाचार के पथ पर चलकर,
जीवन बने नित शिवमय।
माँ ब्रह्मचारिणी की साधना से, जीवन-पथ ज्योतिर्मय।।


कुमार महेन्द्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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