माँ ब्रह्मचारिणी की साधना से, जीवन-पथ ज्योतिर्मय
कुमार महेन्द्रनवरात्र की द्वितीया बेला,
भक्ति-सुगंध चहुँ ओर।
श्रद्धा के दीप जगमग करते,
मन में उमंग की भोर।
तप, त्याग, संयम की देवी,
महिमा शुभ मंगलमय।
माँ ब्रह्मचारिणी की साधना से, जीवन-पथ ज्योतिर्मय।।
श्वेत वसन, कर जपमाला,
कमंडल की छवि न्यारी।
तप की उज्ज्वल आभा से,
जगमग दुनिया सारी।
कष्ट मिटें, संताप हरें,
कृपा बरसे, जीवन सुखमय।
माँ ब्रह्मचारिणी की साधना से, जीवन-पथ ज्योतिर्मय।।
शिव को पाने हेतु मैया,
कठिन उपासना की।
अटल निष्ठा, दृढ़ संकल्प से,
सार्थक साधना की।
त्याग, तपस्या और संयम,
जीवन के शुभ आश्रय।
माँ ब्रह्मचारिणी की साधना से, जीवन-पथ ज्योतिर्मय।।
ज्ञान-ज्योति अंतर्मन जागे,
दूर हो अज्ञान अँधेरा।
आत्मबल और धैर्य बढ़े,
आशा का हो सवेरा।
सदाचार के पथ पर चलकर,
जीवन बने नित शिवमय।
माँ ब्रह्मचारिणी की साधना से, जीवन-पथ ज्योतिर्मय।।
कुमार महेन्द्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8


0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews