"रावण हमसे अच्छा रहे"
रचना *डॉ अनमोल कुमार*रावण हमसे अच्छा रहे, ई बात सही बा,
विद्या, बल, ज्ञान में ऊ, सबसे बड़हन बा।
चारों वेद कंठ में, शास्त्र के ज्ञानी रहे,
शिव जी के भक्त रहे, तप के ध्यानी रहे।
वीणा बजावे जाने, संगीत के शान रहे,
लंका के राजा रहे, कुल के अभिमान रहे।
हमनी में काम, क्रोध, लोभ भरल बा भारी,
रावण में एक ही दोष, सीता के चोरी।
हम रोज झूठ बोलिले, रावण सत्यवादी रहे,
हम अपना बहिन खातिर, कुछो ना करीले।
रावण आपन बहिन के, बदला लेवे गइले,
एही कारण अपना कुल के, दांव पर लगइले।
ज्ञान में हमसे बड़ा, मान में हमसे बड़ा,
फेर भी एक अहंकार, ले डूबल ओकरा गढ़ा।
सीख लेवे के बा त, ओकरा ज्ञान से सीख,अहंकार के छोड़ के, राम के राह पर सीख।
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