पद की गरिमा
संजय जैनजवाब देही से भाग रहे हो
पर अपने पद पर जमे हो।
नियम कायदे समझते नही
पर मुख्य पद के लालची हो।।
काम-धाम करना आता नही
बातों का लेखा जोखा है।
समाज में आदर भाव नही
पर पद की लालसा रखते हो।।
मान प्रतिष्ठा कमाई जाती है
जिसे पैसों से नही खरीद सकते।
इसके लिए सेवा समर्पण और
आदर के साथ त्याग जरूरी है।।
सारी जिंदगी मान-सम्मान के लिए
भाग दौड़ हम करते रहते है।
तब जाकर प्रतिष्ठा मिलती है
और संस्थाओं में उच्च स्थान।।
जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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