इकतीस अक्टूबर, लौह स्मृतियों से तरबतर

(सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्य तिथि पर कुछ पंक्तियां सादर निवेदित हैं 🙏)

इकतीस अक्टूबर, लौह स्मृतियों से तरबतर

कुमार महेंद्र
सरदार वल्लभभाई पटेल,
भारत के गौरव, लौह पुरुष।
खंड-खंड बँटे रजवाड़ों को,
एक सूत्र में बाँधा अविरत।
असंभव को संभव कर दिया,
राष्ट्र-एकता का स्वप्न सजाकर।
इकतीस अक्टूबर, लौह स्मृतियों से तरबतर।।


दूजी ओर खड़ी थीं शक्ति,
इंदिरा, लौह महिला महान।
दशकों तक जिनके नेतृत्व में,
गूँजा भारत का यशोगान।
शत्रु की हर चुनौती के सम्मुख,
अडिग रहा उनका तेवर।
इकतीस अक्टूबर, लौह स्मृतियों से तरबतर।।


संकट में भी विचलित न हुईं,
अदम्य साहस की प्रतिमूर्ति।
राष्ट्रहितों की रक्षा करते,
लिख गईं बलिदान की कृति।
एक ने दी अखंडता देश को,
एक ने बढ़ाया देश का स्वर।
इकतीस अक्टूबर, लौह स्मृतियों से तरबतर।।


दोनों के ही चरणों में,
नतमस्तक है हिंदुस्तान।
एक की जन्म-जयंती पावन,
दूजी का अमर बलिदान।
उनके शौर्य, साहस, कर्मों पर,
गर्वित हैं धरा और अंबर।
इकतीस अक्टूबर, लौह स्मृतियों से तरबतर।।


कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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