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जीवन सौंदर्य है, इसकी प्रशंसा करें

जीवन सौंदर्य है, इसकी प्रशंसा करें

कुमार महेंद्र
क्षितिज पर उगती,
भोर की लाली।
पत्तों पर बिखरी,
शबनम मतवाली।
प्रकृति के इस अनुपम उपहार की,
कभी न उपेक्षा करें।
जीवन सौंदर्य है, इसकी प्रशंसा करें।।


हर पल कोई नया रंग,
नई उमंग लाता है।
सूना हृदय भी प्रेम-सुधा से,
फिर मुस्काता है।
ईश्वर के इस सुंदर वरदान की,
सदैव स्नेहिल रक्षा करें।
जीवन सौंदर्य है, इसकी प्रशंसा करें।।


माना राहों में,
काँटे भी आएँगे।
दुःख के घने बादल,
जीवन पर छाएँगे।
पतझड़ के बाद खिलते,
मधुमास की प्रतीक्षा करें।
जीवन सौंदर्य है, इसकी प्रशंसा करें।।


इसकी धड़कनों में,
मधुर संगीत समाया है।
हर पराजय ने ही,
विजय का मार्ग दिखाया है।
तज नैराश्य भावों को,
उर में नव-आशा भरें।
जीवन सौंदर्य है, इसकी प्रशंसा करें।।


कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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