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जीवन का सत्य

जीवन का सत्य

संजय जैन

जीवन के पथ पर चलकर
वैराग उमड़ सकता है।
संसार में रहकर वो
संसार को तज सकता है।।

भटके हुए राही को जो
सही रास्ता जो दिखता।
वो ही लोगों दुनियाँ में
खूब नाम अपना कमाता।
इसलिए हे मानव तू अब
सच्चाई को दिलसे समझ ले
और अपने मानव जीवन को
यहाँ अब सार्थक तू कर ले।।
जीवन के पथ पर चलकर
वैराग उमड़ सकता है...।।

जीने और मरने से जो
जीवन में कभी न डरता।
ऐसा ही प्राणी लोगों
जीवन का सत्य समझता।
इसलिए हे मानव अब तू
कुछ नया जीवन में करना।
जिसे देखकर लोगों में
सेवा का भाव जाग जाये।।
जीवन के पथ पर चलकर
वैराग उमड़ सकता है...।।


निज को पहचाने का जो
तुझे मौका जो मिला है।
जीवन की लीलाओं का
आनंद तूने बहुत लिया है।
अब त्याग तू दिलसे कर ले
और धर्म को तू समझ ले।
जीवन की सच्चाई को
बस दिलसे तू समझ ले।।
जीवन के पथ पर चलकर
वैराग उमड़ सकता है...।।


जीवन में किसी भी पल में
वैराग उमड़ सकता है।
संसार में रहकर खुद ही
संसार को छोड़ सकता है।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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