यही रात अंतिम, यही रात भारी

यही रात अंतिम, यही रात भारी

डॉ अनमोल कुमार


बिहार विधान परिषद शिक्षक और स्नातक निर्वाचन — 23 अक्टूबर 2026
यही रात अंतिम, यही रात भारी,
कल होगी शिक्षक और स्नातक मतों की तैयारी!
किसके सिर सजेगा विजय का ताज,
किसके हाथ आएगा शिक्षक और स्नातक समाज?
एक रात शेष, कल मतदान है,
शिक्षक समाज का अपना सम्मान है।
वादों की कसौटी, कर्मों की बारी,
यही रात अंतिम, यही रात भारी!
शिक्षक और स्नातक की गरिमा, शिक्षा का मान,
लोकतंत्र की शक्ति, मतदाता की पहचान।
सोच-समझकर करना मतदान,
शिक्षा और शिक्षक हित का रखना ध्यान।
कल का सूरज नया संदेश लाए,
शिक्षक और स्नातक समाज की आवाज बुलंद हो जाए।
निर्णय आपका, अधिकार आपका,
लोकतंत्र का यह उपहार आपका!
यही रात अंतिम, यही रात भारी,
कल तय होगी मतों की जिम्मेदारी!एक बात विशेष: 23 अक्टूबर 2026 के मतदान के संदर्भ में यह कविता शिक्षक और स्नातक मतदाताओं को अपने विवेक, उम्मीदवारों के कार्यों और शिक्षक / स्नातक के हितों के आधार पर निर्णय लेने का संदेश देती है।
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