मनुवाद की आलोचना करने वालों को आर्य समाज का कड़ा जवाब : मनु हैं भारतीय संस्कृति के प्राण तत्व

ग्रेटर नोएडा। यहां स्थित ग्राम महावड़ में आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर के तत्वावधान में आर्य समाज महावड़ की ओर से मनुवाद और मनुवादी व्यवस्था पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें आर्य समाज के वक्ताओं ने कहा कि जो लोग मनुवाद की आलोचना करते हैं उन्हें मनु, मनुवाद और मनुवादी व्यवस्था के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इस संगोष्ठी के मुख्य वक्ता ब्रह्मचारी आर्य सागर ने कहा कि मनु भारतीय संस्कृति के प्राण तत्व हैं। जिनकी व्यवस्था को कोई भी वैज्ञानिक समाज नकार नहीं सकता। उन्होंने कहा कि डा. भीमराव अंबेडकर भारत में जातिवाद के घोर विरोधी थे और वह इसे भारतीय समाज की उन्नति में सबसे बड़ी बाधा मानते थे। डा. अंबेडकर उन लोगों की मानसिकता के भी विरोधी थे, जिन्होंने अपनी दुकानदारी को चमकाने और निहित स्वार्थों की पूत्र्ति के लिए भारतीय समाज में जातिवाद को प्रोत्साहित किया और समाज में ऊंच-नीच व छुआछूत की बीमारी को भी फैलाया। डा. अंबेडकर मनु को जातिवाद का प्रणेता नहीं मानते थे और वह महर्षि दयानंद जी महाराज की जाति विषयक अवधारणा से तथा मनु के सिद्घांतों की आर्य समाजी व्याख्या से भी सहमत व संतुष्ट थे। वह चाहते थे कियह परम्परा आगे बढ़े और भारतीय समाज में समरसता का परिवेश सृजित हो।
उन्होंने कहा कि डा. भीमराव अंबेडकर का यही सपना था। पर उनके जाने के पश्चात उनकी विरासत को जिन लोगों ने भुनाने का प्रयास किया- उन्होंने देश का जातिवाद के नाम पर धु्रवीकरण करना आरंभ कर दिया। डा. अंबेडकर जी की प्रतिमाएं भी कुछ विशेष लोगों ने ही अपने मौहल्लों में लगानी आरंभ कर दीं। जितना वह डा. अंबेडकर जी को अपना मानकर उन पर अपना अधिकार जमाते गये-उतना ही उन्हें अन्य लोगों ने छोडऩे का कार्य किया, इस प्रकार एक महान विचारक और जाति तोडक़र समाज जोडऩे की संकल्पना करने वाला समाज सुधारक किसी जाति विशेष या वर्ग विशेष का बना दिया गया। निश्चित ही डा. अंबेडकर के साथ यह अन्याय था और इसके लिए कोई विशेष जाति या वर्ग उत्तरदायी नहीं रहा, हम सभी दोषी हैं।
विशिष्ट वक्ता के रूप में उपस्थित रहे डॉक्टर देवेंद्र सिंह आर्य ने कहा कि डा. अंबेडकर के नाम पर जातीय भेदभाव को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न सामाजिक संगठन बने और कई राजनीतिक दलों ने भी डा. अंबेडकर के नाम को अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए प्रयोग किया। कई राजनीतिक दलों को इसका लाभ भी मिला और वे सत्ता शीर्ष तक पहुंच गये। परंतु हम सारी नकारात्मक सोच से देश को हानि हुई। 1947 में हम ‘एक भारत’ बनाने का संकल्प लेकर आगे बढ़े थ् पर आज हम जातीय विसंगतियों के मकडज़ाल में फंसकर रह गये हैं।
जबकि जिलाध्यक्ष डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि आज परिवारों में जिस प्रकार का तनाव का माहौल है उसे दूर कर समरस बनाना समरसतावादी समाज की मूलभूत आवश्यकता है। इसलिए हमें परिवारों की बिगड़ी हुई व्यवस्था को सुधारने की ओर ध्यान देना चाहिए। सारी राजनीति दूषित हो गयी है और सारा सामाजिक परिवेश भी विषैला हो गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर ‘स्वच्छता अभियान’ की आवश्यकता है जो लोग वर्तमान संविधान को केवल गाली देने का ही कार्य कर रहे हैं उन्हें यह भी समझना चाहिए कि इसी संविधान को यदि पूर्ण मनोयोग से सही ढंग से लागू कर दिया जाए तो यह संविधान भी हमें हमारी अनेकों समस्याओं का समाधान दे सकता। इसके अनेकों प्राविधान हमारे आदि संविधान निर्माता मनु की भावना के अनुरूप हैं। उन्हें खोजकर सही ढंग से लागू कराने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ धर्मप्रकाश आर्य ने इस बात पर जोर दिया कि मनु महाराज वर्ण व्यवस्था के समर्थक थे, जातिवादी व्यवस्था के नहीं। जातिवादी व्यवस्था को उनके नाम के साथ उन लोगों ने जोड़ा है जो मनु महाराज के विषय में कुछ भी नहीं जानते। उन्होंने कहा कि आज हमें मनु महाराज के वास्तविक स्वरूप को स्थापित करने की आवश्यकता है। हिंदू समाज की एकता के लिए यह बहुत अधिक आवश्यक हो गया है कि हम सब एक ही चिंतन के धनी बने और डॉक्टर अंबेडकर के राष्ट्रवाद को स्थापितकरें।सभी वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आर्य समाज मनु मनुवाद और मनुवादी व्यवस्था के प्रति प्रारंभ से ही स्पष्ट कहता रहा है कि मनुवादी व्यवस्था पूर्णतया वैज्ञानिक अवधारणा पर आधारित है। जिससे परिवार से समाज और समाज से राष्ट्र और अंत में विश्व निर्माण को सही स्वरूप प्रदान किया जा सकता है। इस कार्यक्रम का सफल संचालन वेद प्रचारिणी सभा के जिलाध्यक्ष प्रधान विजेंद्र सिंह आर्य द्वारा किया गया। कार्यक्रम में स्वामी ओमानंद जी महाराज, स्वामी वेदानंद जी महाराज, स्वामी प्राण देव जी महाराज, मास्टर मौजीराम नागर, बलवीर सिंह आर्य, प्रधान श्रीपाल भाटी , यशवीर सिंह आर्य,गंगारामआर्य आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये। गांव वालों की ओर से ज्ञानेंद्र सिंह आर्य एडवोकेट द्वारा धन्यवाद किया गया। कार्यक्रम में रंगीलाल आर्य,बलबीर सिंह आर्य, जिला मंत्री पंडित धर्मवीर आर्य, जिला उपाध्यक्ष महावीर सिंह आर्य, दिवाकर आर्य, विजेंद्र सिंह आर्य, शेखर आर्य, सत्यवीर आर्य, अनार सिंह आर्य, जीतराम आर्य,सुदेश आर्य, प्रधान टीकम सिंह, राज सिंह मुकदम, जितेंद्र आर्य, कपिल आर्य , हवलदार अभय राम, डॉ ब्रह्म सिंह आर्य, इंदर सिंह महाशय, कैप्टन सुरेश चंद, नवीन आर्य, विजय सिंह, हेमसिंह आर्य, गजराज सिंह आर्य , सहित सैकड़ो लोग उपस्थित थे।
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