मौत से संघर्ष

मौत से संघर्ष

जय प्रकाश कुवंर
एक रोगी जीवन के लिए मौत से संघर्ष कर रहा है,
तो उसका परिचारक उसका जीवन बचाने के लिए लड़ रहा है।
इसी कसमोंकश में एक एक दिन दोनों का,
अच्छी उम्मीद की तमन्ना लिए गुजर रहा है।।
जीवन देने वाले ने तो अपनी डायरी में,
उपर जाने का दिन भी तो लिख दिया है।
हमें अनजान बनाकर उस परवरदिगार ने,
हमें उम्मीद पर जीने के लिए भ्रमित किया है।।
यही तो जीवन संघर्ष है, बस उम्मीद लिए जीये जाओ।
सुख दुख, गम हंसी, समान समझ पीये जाओ।।
तुम्हारा संघर्ष यों ही चलता रहेगा और देखते देखते,
उपर वाले की डायरी में लिखा वह निर्धारित दिन आ जायेगा।
खोंता पिंजरा सब यहाँ का यहीं छोड़,
मौत से संघर्षरत पंछी उड़ कर चिरनिद्रा में सो जाएगा।।

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