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अलौकिक सिद्धियों की प्राप्ति, माँ महागौरी के वंदन से

(शारदीय नवरात्र — अष्टम दिवस)

अलौकिक सिद्धियों की प्राप्ति, माँ महागौरी के वंदन से

कुमार महेंद्र
सनातन संस्कृति का गौरव,
दुर्गाष्टमी का पावन त्योहार।
भक्ति-सुधा से रोम-रोम पुलकित,
मन में उमंग अपार।
भक्तवत्सला माँ श्वेतवर्णी,
जग दमके तेरे अभिनंदन से।
अलौकिक सिद्धियों की प्राप्ति, माँ महागौरी के वंदन से।।


चतुर्भुजा माँ शक्ति-स्वरूपा,
अप्रतिम सौंदर्य की खान।
वृषभारूढ़ा दिव्य भवानी,
महिमा गाता सकल जहान।
त्रिशूल-डमरू हाथ विराजें,
मिटे हृदय का भय माँ के स्मरण से।
अलौकिक सिद्धियों की प्राप्ति, माँ महागौरी के वंदन से।।


शांति-सुधा बरसाने वाली,
सुख-समृद्धि की दातार।
श्रद्धा से जो शीश झुकाते,
भर देतीं सुख का भंडार।
करुणामयी जगजननी मैया,
मन खिल उठता कृपा-किरण से।
अलौकिक सिद्धियों की प्राप्ति, माँ महागौरी के वंदन से।।


कैलाशवासिनी हे भवानी,
तेरी महिमा अपरंपार।
मोगरे जैसी धवल आभा,
महके जीवन का संसार।
कन्या-पूजन, दीप-अर्चना,
मन पावन हो माँ के दर्शन से।
अलौकिक सिद्धियों की प्राप्ति, माँ महागौरी के वंदन से।।


कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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