जीविका दीदियां सिलाई से गढ़ रही रोजगार और उद्यमिता की नई राह, 53 हजार दीदी जुड़ी सिलाई से

- ग्रामीण विकास विभाग में जीविका दीदियों के स्तर से चलाई जा रही सिलाई घर योजना के माध्यम से दीदियां तैयार कर रही सरकारी स्कूल और आंगनबाड़ी के बच्चों का पोशाक
पटना, 08 अक्टूबर
ग्रामीण इलाकों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में जीविका की भूमिका बेहद खास है। जीविका दीदियां रसोई चलाने से लेकर सरकारी स्कूलों खासकर प्राथमिक स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए पोशाक तैयार करने का काम बखूबी कर रही हैं। जीविका दीदी की सिलाई घर योजना के माध्यम से वर्तमान में बिहार में 53 हजार से अधिक दीदियां सिलाई गतिविधि से जुड़ी हुई हैं। राज्यभर में जीविका के माध्यम से लगभग 50 हजार महिलाओं को यूनिफॉर्म की सिलाई का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। 1 हजार 732 महिलाओं को विशेष सिलाई प्रशिक्षण तथा 30 सदस्यों को सिलाई और प्रबंधन में पर्यवेक्षक स्तर पर उन्नत किस्म का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
जीविका के स्तर से इसे लेकर जानकी जीविका महिला सिलाई उत्पादन कंपनी लिमिटेड का गठन भी किया गया है। इसके जरिए राज्यभर में सिलाई से संबंधित गतिविधियां संगठित रूप से संचालित की जा रही हैं। अब तक आंगनबाड़ी केंद्रों के अंतर्गत 79 लाख से अधिक यूनिफॉर्म सेट, अनुसूचित जाति एवं जनजाति स्कूलों के लिए करीब 1.10 लाख पोशाक और अति-पिछड़ा एवं पिछड़ा वर्ग के स्कूलों के लिए करीब 30 हजार पोशाक की आपूर्ति सफलतापूर्वक की जा चुकी है। इसके अलावा बिहार के सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए भी बड़ी संख्या में पोशाक की आपूर्ति की गई है।
जीविका की सामुदायिक संस्थाओं के माध्यम से जुड़ी महिलाओं को सिर्फ बचत और ऋण तक ही सीमित नहीं रखा जाए, बल्कि उन्हें आय सृजन और उद्यमिता के नए आयामों से भी जोड़ा जाए। कृषि, पशुपालन, गैर कृषि गतिविधियां, खाद्य प्रसंस्करण, कौशल विकास, वित्तीय समावेशन और महिला उद्यमिता के साथ सिलाई जैसी गतिविधियों को जोड़कर ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि सरकारी संस्थानों की आवश्यकता को ग्रामीण महिलाओं की उत्पादन क्षमता से जोड़ा जा रहा है। इससे सरकारी खरीद का एक हिस्सा सीधे स्थानीय महिला उत्पादकों तक पहुंचता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में धन का प्रवाह बढ़ता है।
*कोट में......*
पोशाक तैयार करने में दीदियों के स्तर से की जा रही पहल बेहद सराहनीय है। सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में सिलाई से जुड़ी महिलाओं की संख्या, उत्पादन क्षमता और बाजार तक पहुंच को बढ़ाना है। गुणवत्ता, डिजाइन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, डिजिटल मार्केटिंग तथा बड़े बाजारों से संपर्क या लिंक स्थापित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ताकि अधिक से अधिक संख्या में जीविका दीदियों के माध्यम से तैयार उत्पादों को राज्य के बाहर भी व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा सके। आज जीविका दीदियां सिर्फ अपने परिवार का सहारा नहीं हैं। बल्कि, बिहार की प्रगति की मजबूत आधारशिला बन चुकी हैं। ग्रामीण महिलाओं में व्यावसायिक समझ, गुणवत्ता के प्रति जागरूकता, बाजार की समझ और उद्यमशीलता का विकास हो रहा है।- श्रवण कुमार (मंत्री, ग्रामीण विकास विभाग और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग)
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8


0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews